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: वन विभाग की लापरवाही से गई एक और जान! ग्राम बनिया में हाथियों का तांडव – घंटों बाद भी नहीं पहुंचे अफसर, मचा बवाल,

Shubh Arvind Sharma

Thu, May 29, 2025
वन विभाग की लापरवाही से गई एक और जान! ग्राम बनिया में हाथियों का तांडव – घंटों बाद भी नहीं पहुंचे अफसर, मचा बवाल, कटघोरा, 29 मई – कोरबा जिले के चोटिया क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बनिया में आज सुबह एक दर्दनाक और बेहद आक्रोशित कर देने वाली घटना घटित हुई। जंगली हाथी के हमले में गांव के निवासी संतोष निर्मलकर पिता चीज राम निर्मलकर की मौके पर ही मौत हो गई। यह कोई प्राकृतिक दुर्घटना नहीं, बल्कि वन विभाग की घोर लापरवाही और प्रशासनिक असंवेदनशीलता का खामियाजा था, जिसकी कीमत एक निर्दोष ग्रामीण को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। तीन घंटे बाद भी कोई नहीं आया – आखिर कब जागेगा सिस्टम? घटना शाम लगभग 7 बजे की है, जब संतोष निर्मलकर का आमना-सामना एक बेकाबू हाथी से हो गया, जो बहरा क्षेत्र से पानी पीकर लौट रहा था। हाथी ने अचानक हमला कर संतोष को बेरहमी से कुचल डाला। ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी, लेकिन तीन घंटे बीत जाने के बाद भी न कोई रेंजर पहुंचा, न कोई अधिकारी, न कोई मदद। क्या एक गरीब ग्रामीण की जान इतनी सस्ती है? क्या वन विभाग सिर्फ फाइलों में रिपोर्ट बनाने और बयानबाजी करने तक ही सीमित है? गांव में मातम, घर में चीख-पुकार, बाहर हाथी का कहर संतोष निर्मलकर की मौत के बाद गांव में मातम पसरा है। उनके परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। दूसरी तरफ हाथी अब भी गांव की सीमा में डेरा जमाए हुए है। कोई भी खेतों में नहीं जा रहा, लोग घरों में दुबके हुए हैं – गांव एक खुले आतंक का मैदान बन गया है। गुस्साए ग्रामीण बोले – अब बर्दाश्त नहीं करेंगे ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। हाथियों की आवाजाही लंबे समय से हो रही है, लेकिन वन विभाग सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। आज एक जान गई है, कल और भी जा सकती हैं। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन और पुतला दहन की चेतावनी दे रहे हैं। ग्रामीणों की प्रमुख मांगें: संतोष निर्मलकर के परिवार को तत्काल 20 लाख रुपये मुआवजा मिले। हाथी को गांव से बाहर खदेड़ने के लिए तत्काल वन अमला तैनात हो। लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए। गांव में स्थायी समाधान हेतु वन्यजीव निगरानी टीम और फेंसिंग की व्यवस्था हो। ग्राम बनिया का संतोष निर्मलकर अब हमारे बीच नहीं है – लेकिन उसकी मौत वन विभाग की नींद तोड़ पाएगी या नहीं, ये वक्त बताएगा।

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