पुलिस और आबकारी विभाग की खुली पोल! : अवैध शराब माफिया के आगे नतमस्तक हुआ तंत्र, चूड़ियां पहनकर घर से निकलीं गाँव की महिलाएं!
Shubh Arvind Sharma
Wed, Oct 7, 2026
पुलिस और आबकारी विभाग की खुली पोल! अवैध शराब माफिया के आगे नतमस्तक हुआ तंत्र, चूड़ियां पहनकर घर से निकलीं गाँव की महिलाएं!
कटघोरा (कोरबा):कहने को तो शासन नशामुक्त समाज की दुहाई देता है, लेकिन कोरबा जिले के पाली विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कुटेलामुड़ा की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहाँ का आबकारी तंत्र अवैध शराब बेचने वाले रसूखदार माफियाओं के सामने पूरी तरह घुटने टेक चुका है। जब सरकारी महकमे जेबें गर्म करके मौन साध लें, तो समाज को खुद उठना पड़ता है। गाँव को बर्बादी से बचाने के लिए अब कुटेलामुड़ा की माताओं और बहनों ने खुद मोर्चा संभाल लिया है और पंचायत से लेकर जिला कलेक्टर तक सीधे सिस्टम की चूलें हिला दी हैं।
पंचायत से जिला मुख्यालय तक उठी नशामुक्ति की गूंज, 'नशा मुक्ति समिति' बनाने की मांग
अवैध शराब के खिलाफ कुटेलामुड़ा की महिलाओं का गुस्सा अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। महिलाओं ने श्रीमती सरपंच महोदया (चंद्रिका पैकरा) और ग्राम सचिव के माध्यम से भी एक औपचारिक मोर्चा खोल दिया है। इस नए शिकायती पत्र में महिलाओं ने स्पष्ट मांग की है कि ग्राम पंचायत स्तर पर तुरंत एक 'नशा मुक्ति समिति' का गठन किया जाए।
इसके साथ ही, ग्रामीणों ने मांग की है कि गाँव के कोटवार के माध्यम से शराब बनाने और बेचने वालों को ग्राम स्तर पर मुनादी कराकर सख्त चेतावनी दी जाए और मना कराया जाए। इस आवेदन पर सरपंच चंद्रिका पैकरा और ग्राम सचिव के साथ-साथ शिवकुमारी, तुलसी बाई, ओमती, लीला, ललिता बाई जैसी गाँव की दर्जनों जागरूक महिलाओं के हस्ताक्षर हैं, जो यह साबित करता है कि अब गाँव की कोई भी महिला चुप बैठने को तैयार नहीं है।

शर्मनाक! "कलेक्टर से परमिशन लाओ, तब शराब पकड़ेंगे" – आबकारी विभाग का यह है असली चेहरा!
ग्राम कुटेलामुड़ा की महिलाओं ने कलेक्टर कार्यालय में जो शिकायत दर्ज कराई है, वह आबकारी विभाग के निकम्मेपन पर करारा तमाचा है। महिलाओं का साफ़ कहना है कि जब भी वे अपनी जान जोखिम में डालकर आबकारी विभाग को गाँव की गलियों में चल रही अवैध शराब भट्ठियों की सटीक सूचना देती हैं, तो विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय बेशर्मी की हदें पार कर देते हैं।
ग्रामीणों को सुरक्षा और न्याय देने के बजाय आबकारी विभाग के अधिकारी सीधे पल्ला झाड़ते हुए कहते हैं— "कलेक्टर कोरबा से लिखित परमिशन (अनुमति) लेकर आओ, तभी हम कोई कार्रवाई करेंगे।"
अब जनता इन मठाधीश अधिकारियों से पूछना चाहती है कि क्या अवैध शराब पकड़ने का कानून सिर्फ कागज़ों पर है? क्या अब अवैध शराब माफिया को रंगे हाथों पकड़ने के लिए भी पीड़ित जनता को कलेक्टर दफ्तर के चक्कर काटने होंगे? यह सीधे तौर पर विभागीय मिलीभगत और खुलेआम माफिया को संरक्षण देने का मामला है, जिसके दम पर शराब तस्कर बिना किसी खौफ के गाँव-गाँव में जहर घोल रहे हैं।

बच्चों का बर्बाद हो रहा बचपन, रोज़ की शर्मिंदगी से फूटा नारी शक्ति का गुस्सा
गाँव की आक्रोशित महिलाओं ने दोटूक लफ्ज़ों में बताया कि इस अवैध कारोबार ने उनके घर-आँगन को नरक बना दिया है। गाँव का सामाजिक ढांचा पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो चुका है। सबसे ज्यादा कलेजा तब फटता है जब स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों को नशे की लत की तरफ धकेला जा रहा है। गाँव की गलियाँ शराबियों का अड्डा बन चुकी हैं, जहाँ से गुजरते वक्त माँ-बेटियों को आए दिन घोर शर्मिंदगी और बदसलूकी का सामना करना पड़ता है।
जब पानी सिर के ऊपर निकल गया, तो इन जांबाज महिलाओं ने खुद शराबबंदी करने का बीड़ा उठा लिया। महिलाओं का यह कदम व्यवस्था के गाल पर वो तमाचा है जो यह याद दिलाता है कि जब सरकारी तंत्र फेल हो जाता है, तो नारी शक्ति को खुद चंडी का रूप धारण करना पड़ता है। लेकिन बेहद अफ़सोस और शर्म की बात है कि जहाँ इन महिलाओं की पीठ थपथपाई जानी चाहिए थी, वहाँ आबकारी विभाग और पुलिस की बेरुखी और निकम्मेपन ने इन्हें खून के आँसू रोने पर मजबूर कर दिया है।

पंचायत और कलेक्टर की 'सील' तो लग गई, लेकिन क्या जागेगा सोया हुआ तंत्र?
सरपंच-सचिव से लेकर कलेक्टर कार्यालय और जिला आबकारी अधिकारी तक अक्टूबर 2026 की आधिकारिक पावती (सील) के साथ यह शिकायती पत्र जमा हो चुका है। गांव की जनता अब सीधे कोरबा जिलाधीश महोदय और स्थानीय पंचायत प्रशासन से सवाल करती है:
1. क्या जनता को ही परमिशन लाने का ज्ञान देने वाले इन आबकारी अफसरों पर तुरंत सस्पेंशन की गाज गिरेगी?
2. क्या ग्राम पंचायत कुटेलामुड़ा में तत्काल 'नशा मुक्ति समिति' का गठन कर कोटवार के जरिए कड़े कदम उठाए जाएंगे?
3. क्या कुटेलामुड़ा की महिलाओं को सुरक्षा और उनका नशामुक्त गाँव वापस मिलेगा?
यह सिर्फ एक आवेदन नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ एक खुली चेतावनी है। अगर समय रहते कुटेलामुड़ा में अवैध शराब का यह गंदा धंधा बंद नहीं हुआ, तो महिलाओं का यह आक्रोश उग्र जन-आंदोलन और चक्का जाम का रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन , पुलिस और आबकारी विभाग की होगी।
Tags :
कोरबा कटघोरा
विज्ञापन
विज्ञापन