कटघोरा में अटल जी की प्रतिमा निर्माण में 'अंधेर नगरी चौपट राजा'; : ठेकेदार और उप अभियंता ने मिलकर बोए भ्रष्टाचार के बीज, शासन ने कसी नकेल
Shubh Arvind Sharma
Thu, Oct 1, 2026
कटघोरा में अटल जी की प्रतिमा निर्माण में 'अंधेर नगरी चौपट राजा'; ठेकेदार और उप अभियंता ने मिलकर बोए भ्रष्टाचार के बीज, शासन ने कसी नकेल
नवा रायपुर अटल नगर / कोरबा:
कहते हैं कि "चोरी और ऊपर से सीनाजोरी" ज्यादा दिन नहीं चलती। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के नगर पालिका परिषद कटघोरा में भी कुछ ऐसा ही खेल चल रहा था, जिसे शासन ने बेनकाब कर दिया है। कटघोरा के अटल परिसर में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा निर्माण में अधिकारियों और ठेकेदार ने मिलकर "गंगा नहाने" (बहती गंगा में हाथ धोने) की कोशिश की, लेकिन अब शासन के कड़े रुख से उनके "घोड़े खुल गए हैं" (पोल खुल गई है)।
प्रतिमा निर्माण में हुई भारी तकनीकी लापरवाही और घटिया गुणवत्ता को लेकर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मंत्रालय ने जांच के बाद दोषियों की "खाट खड़ी" करने की तैयारी कर ली है।
पेटी ठेके का खेल: मुख्य ठेकेदार ने चांदी काटने के चक्कर में डुबोई अपनी ही लुटिया!
इस पूरे मामले में अब सूत्रों के हवाले से एक और बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। "घर का भेदी लंका ढाए" की तर्ज पर खबर मिल रही है कि मुख्य ठेकेदार ने टेंडर हथियाने के बाद खुद काम करने के बजाय, केवल घर बैठे मलाई खाने के चक्कर में इसे 'पेटी ठेका' पर किसी और को सौंप दिया था।
अब उस पेटी ठेकेदार ने अपनी जेबें भरने के लिए निर्माण कार्य में ऐसी "भर्राशाही" मचाई और जमकर "हाथ साफ किया" कि सीधे तौर पर मुख्य ठेकेदार की ही लुटिया डुबो दी। मुनाफा कमाने की अंधी दौड़ में मुख्य ठेकेदार ने "लोभ के मारे खोया होश" वाली कहावत सच कर दी। उसने यह तक नहीं देखा कि पेटी ठेकेदार किस तरह श्रद्धेय अटल जी की प्रतिमा के सम्मान और सरकारी पैसे के साथ खिलवाड़ कर रहा है। अब जब गर्दन फंसने की बारी आई है, तो मुख्य ठेकेदार के "हाथ-पांव फूल रहे हैं"।

आंदोलनों के बाद भी CMO के "कान पर जूं तक नहीं रेंगी"; क्या मुख्य अधिकारी दोषी नहीं?
इस पूरे भ्रष्टाचार के महासंग्राम में जो सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न खड़ा होता है, वह है नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) की कार्यप्रणाली पर स्थानीय जनता, सामाजिक संगठनों और विपक्ष द्वारा इस घटिया निर्माण कार्य को लेकर पूर्व में कई उग्र आंदोलन, चक्काजाम और धरना-प्रदर्शन किए गए, ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन प्रशासनिक मुखिया के "कानों पर जूं तक नहीं रेंगी"। साहब पूरी तरह "कुंभकर्णी नींद" सोए रहे और जनआक्रोश को "नक्कारखाने में तूती की आवाज" समझकर दबाते रहे।
जब परिषद के भीतर जनता की गाढ़ी कमाई पर इतना बड़ा "गोरखधंधा" चल रहा था, तो साहब "धृतराष्ट्र" बनकर क्यों बैठे रहे? CMO की नाक के नीचे पूरा खेल हो गया, ठेकेदार और उप अभियंता मिलकर नियमों की धज्जियां उड़ाते रहे, लेकिन मुख्य अधिकारी ने अपनी "आंखें मूंद रखी थीं"।
जनता और शर्मा न्यूज़ आज यह सीधा सवाल पूछ रहा है कि क्या इस पूरे मामले में CMO दोषी नहीं हैं? क्या सिर्फ एक छोटे उप अभियंता (सब-इंजीनियर) को "बलि का बकरा" बनाकर बड़े अधिकारियों को "साफ-पाक" बचा लिया जाएगा? जब तक हर निर्माण कार्य पर अंतिम मुहर लगाने वाले प्रशासनिक मुखिया की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना "टेढ़ी खीर" साबित होगा।

संयुक्त संचालक की जांच में खुला 'घपले का पिटारा'
नगरीय प्रशासन विभाग की जांच में यह साफ हो गया है कि इस काम में "अंधेर नगरी चौपट राजा" वाली स्थिति थी। क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर के संयुक्त संचालक द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट ने अधिकारियों के दावों की "हवा निकाल दी" है। तकनीकी परीक्षण में साफ पाया गया कि श्रद्धेय अटल जी की प्रतिमा का निर्माण नियमों को ताक पर रखकर किया गया और गुणवत्ता के नाम पर सिर्फ "आंखों में धूल झोंकने" का काम हुआ।

उप अभियंता पर गिरी गाज, 'बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाती'
इस पूरे मामले में "दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली" निकली है। विभाग ने तत्कालीन उप अभियंता (Sub-Engineer) श्री चन्द्रप्रकाश जायसवाल को इस लापरवाही के लिए प्रथम दृष्टया मुख्य मोहरा यानी दोषी पाया है। अब तक अपनी जिम्मेदारी से "पल्ला झाड़ रहे" उप अभियंता के लिए यह आदेश "आसमान से गिरे खजूर पर अटके" जैसा साबित हुआ है। शासन ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को ही उनके खिलाफ सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, जो खुद इस व्यवस्था के कटघरे में खड़े हैं।
ठेकेदार पर कानूनी फंदा, 'बगल में छूरी, मुंह में राम'
प्रतिमा बनाने वाले ठेकेदार ने अपनी जेबें भरने के लिए जो "ऊधम मचाया" था, अब उस पर भारी कानूनी गाज गिरने वाली है। शासन ने साफ कर दिया है कि:
* अनुबंध की शर्तों की धज्जियां उड़ाने वाले ठेकेदार के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
* हालांकि, नियम के मुताबिक ठेकेदार को "अपना राग अलापने" (पक्ष प्रस्तुत करने) का एक आखिरी मौका दिया जाएगा, लेकिन उसके बाद सक्षम अधिकारी उसकी "अक्ल ठिकाने लगाने" वाला अंतिम आदेश जारी करेंगे।

भुगतान पर 'सांप लूंढा', नई प्रतिमा का फरमान
1. तिजोरी पर लगा ताला: ठेकेदार को लगता था कि वह घटिया काम करके भी "नौ दो ग्यारह" हो जाएगा, लेकिन शासन ने उसके बचे हुए सारे भुगतान पर "पानी फेर दिया" है। जब तक दोबारा कड़ी तकनीकी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक एक धेला भी नहीं दिया जाएगा।
2. अब 'दूध का दूध और पानी का पानी' होगा: पुरानी घटिया प्रतिमा को सिरे से खारिज करते हुए विभाग ने साफ कहा है कि मानकों के अनुरूप नई प्रतिमा खड़ी की जाए। नई प्रतिमा के आकार और सामग्री को लेकर अब फूंक-फूंक कर कदम रखा जाएगा ताकि दोबारा कोई "घड़ियाली आंसू" न बहा सके।
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कोरबा कटघोरा
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