कटघोरा पुलिस की अग्निपरीक्षा: : भ्रष्टाचार का साया, अपराधियों का दुस्साहस, रेत माफियाओ का तांडव... क्या कटघोरा में खत्म हो गया है कानून का इकबाल?
Shubh Arvind Sharma
Wed, Oct 7, 2026
कटघोरा पुलिस की अग्निपरीक्षा: भ्रष्टाचार का साया, अपराधियों का दुस्साहस, रेत माफियाओ का तांडव... क्या कटघोरा में खत्म हो गया है कानून का इकबाल?
सड़कों पर RTO और यातायात की चेकिंग का ढोंग, फिर भी बेखौफ दौड़ रहे मौत के सौदागर... जानिए कटघोरा पुलिस के बीते 2 महीनों का खौफनाक रिपोर्ट कार्ड!
कटघोरा (कोरबा)। औद्योगिक जिला कोरबा का शांत कहा जाने वाला कटघोरा क्षेत्र इस समय अपराध, भ्रष्टाचार और जानलेवा हादसों के एक ऐसे भयावह बवंडर में फंस चुका है, जिसने पुलिस प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है। बीते दो महीनों (अगस्त से लेकर अक्टूबर 2026 की शुरुआत तक) का क्राइम ग्राफ और हादसों की कड़वी हकीकत साफ बयां करती है कि कटघोरा पुलिस इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। रक्षक और भक्षक के बीच की महीन रेखा मिट चुकी है, जिससे खाकी की साख पूरी तरह दांव पर लग गई है।
आइए विश्लेषण करते हैं उन विस्फोटक कड़ियों का, जो यह साबित करती हैं कि कटघोरा में कानून-व्यवस्था बनाए रखना अब पुलिस के लिए एक बहुत बड़ी अग्निपरीक्षा बन चुका है:

जब रक्षक ही बने भक्षक: खाकी पर लगा भ्रष्टाचार का अमिट दाग
कटघोरा पुलिस की साख पर सबसे बड़ा प्रहार तब हुआ जब अगस्त 2026 में उसका अंदरूनी तंत्र ही ढह गया।
* शर्मनाक घोटाला: अवैध कबाड़ से लदे ट्रक को सांठगांठ कर छोड़ने और पीड़ित के पैसों से बिना अनुमति दिल्ली की फ्लाइट टिकटें बुक करने के गंभीर आरोप में विभाग में बड़ी गाज गिरी।
* बड़ी कार्रवाई: विभागीय जांच के बाद और स्थानीय मीडिया के अनुसार, तत्कालीन थाना प्रभारी (TI) एम.बी. पटेल, एएसआई राम पांडेय समेत 4 से 8 पुलिसकर्मियों को सामूहिक रूप से सस्पेंड कर दिया गया। एक साथ इतने बड़े स्टाफ का सस्पेंड होना पुलिस महकमे के मुंह पर करारा तमाचा था।

सड़कों पर RTO और यातायात का ढोंग: भारी वाहनों पर कोई लगाम नहीं
कटघोरा-पेंड्रा रोड, जड़गा मोड़ और बायपास पर RTO औऱ यातायात पुलिस की गाड़ियां अक्सर चेकिंग के नाम पर खड़ी दिखाई देती हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस कथित चेकिंग के ठीक सामने से नो-एंट्री के नियमों को ठेंगा दिखाते हुए भारी वाहन शहर के भीतर घुस रहे हैं। हर जगह चेकिंग पॉइंट होने के बावजूद कसनिया-जटगा मोड़ पर हेलमेट पहने युवक को ट्रेलर द्वारा कुचल दिया जाना और अमलडीहा में बिना लाइट के अवैध खड़े ट्रकों से मौतें होना यह साबित करता है कि यह चेकिंग सिर्फ कागजी है या फिर इसका मकसद कुछ और है।

बेखौफ रेत माफिया का तांडव: सड़कों पर दौड़ते 'खूनी ट्रैक्टर'
कबाड़ और कोयला तस्करों के बाद अब कटघोरा में अवैध रेत माफियाओ का तांडव पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। कटघोरा और आसपास की नदियों से अवैध रेत का उत्खनन करने वाले माफिया इस समय पूरी तरह बेलगाम हैं। अवैध रेत से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली बिना किसी डर के, बेहद तेज रफ्तार में रिहायशी इलाकों और मुख्य मार्गों से गुजर रहे हैं। इन ट्रैक्टरों के चालक न तो स्पीड लिमिट का पालन करते हैं और न ही इनके पास कोई वैध दस्तावेज होते हैं। पुलिस और खनिज विभाग की नाक के नीचे चल रहा यह अवैध खेल यह साफ दर्शाता है कि खाकी का खौफ तस्करों के दिलों से गायब हो चुका है।

वर्दी पर हमला और बेखौफ अपराधी: सरेराह खौफ का माहौल
जब अपराधी पुलिस से ही न डरें, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे रह जाती है।
* आरक्षक की पिटाई: सितंबर 2026 में गणेश शोभायात्रा के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस आरक्षक के साथ उपद्रवियों ने बेरहमी से मारपीट की और उसकी वर्दी तक फाड़ दी।
* तूमान में जानलेवा हमला: हाल ही में तूमान क्षेत्र में रेलवे सुपरवाइजर सचिन चौसरिया पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला किया गया। हालांकि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन ये वारदातें अपराधियों के बेखौफ मंसूबों को बयां करती हैं।
बरतराई और मलदा घाट: जंगलों में फैला दहशत का साम्राज्य
कटघोरा का केवल शहरी इलाका ही नहीं, बल्कि ग्रामीण और जंगली रास्ते भी अब असुरक्षित हो चुके हैं।
* सरेराह लूटपाट: बरतराई जंगल के सुनसान मार्ग पर राहगीरों और छोटे व्यापारियों को हथियारों की नोक पर घेरकर सरेराह लूटपाट और मारपीट की गई। सुनसान इलाके का फायदा उठाकर अपराधी घटना को अंजाम देकर आसानी से फरार हो गए।
* मलदा घाट की मिस्ट्री: अक्टूबर की शुरुआत में मलदा घाट के जंगल के भीतर एक अज्ञात व्यक्ति की कई दिन पुरानी सड़ी-गली लाश मिलने से सनसनी फैल गई, जिसकी पहचान बाद में लकवा पीड़ित बुधराम के रूप में हुई। सुनसान रास्तों पर पुलिस पेट्रोलिंग (गश्त) की विफलता के कारण ही ये जंगली इलाके अपराधियों के लिए पनाहगाह बन रहे हैं।
खस्ताहाल मार्ग: जड़गा-पसान मार्ग पर गड्ढों का कहर
PWD की लापरवाही और भारी वाहनों के दबाव से जड़गा मार्ग पूरी तरह जर्जर हो चुका है। जड़गा मोड़ और उसके आसपास के रास्तों पर बने जानलेवा गड्ढों से बचने के चक्कर में यहां रोजाना ऑटो पलट रहे हैं, बसें अनियंत्रित हो रही हैं और बाइक सवार काल के गाल में समा रहे हैं।
पूरा क्राइम और एक्सीडेंट बुलेटिन एक नज़र में
* खाकी दागदार: कबाड़-रिश्वत खेल में थाना प्रभारी (TI) समेत 8 पुलिसकर्मी निलंबित।
* चेकिंग का नाटक: सड़कों पर RTO और ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बाद भी भारी वाहनों और अवैध रेत ट्रैक्टरों की बेधड़क खूनी दौड़।
* खाकी पर वार: ऑन-ड्यूटी आरक्षक को पीटा गया और त्योहार के दौरान वर्दी फाड़ी गई।
* सड़कों पर यमदूत: जड़गा मोड़ पर हेलमेट पहने युवक को कुचलता ट्रेलर; अमलडीहा में बिना लाइट के खड़े ट्रकों से मौत।
* जंगल में खौफ: बरतराई जंगल में राहगीरों से चाकू पर लूट; मलदा घाट में सड़ी-गली लाश मिलने से सनसनी।

जनता का तीखा और सीधा सवाल: क्या यह सिर्फ मिलीभगत का खेल है?
कटघोरा की जनता अब सोशल मीडिया और सड़कों पर खुलकर यह सवाल पूछ रही है कि जब RTO और यातायात पुलिस सड़कों पर मौजूद है, तो भारी वाहन और रेत माफिया इतने बेखौफ कैसे हैं? क्या यह चेकिंग केवल छोटे बाइक सवारों को परेशान करने और कागजी खानापूर्ति के लिए है?
अगर नए थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक (SP) को कटघोरा की जनता का विश्वास वापस जीतना है, तो उन्हें सबसे पहले इस तथाकथित चेकिंग व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा। अवैध रेत माफियाओं के ट्रैक्टरों को तुरंत जब्त करना होगा, भारी वाहनों के लिए नो-एंट्री का कड़ाई से पालन कराना होगा और बरतराई जैसे संवेदनशील जंगलों में रात की गश्त (नाइट पेट्रोलिंग) को दोगुना करना होगा। जब तक इन "सड़क के लुटेरों" और "रेत के सौदागरों" पर कड़ा एक्शन नहीं होगा, तब तक कटघोरा पुलिस इस अग्निपरीक्षा में कभी पास नहीं हो पाएगी।
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कोरबा कटघोरा
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