कटघोरा नगर पालिका विवाद में नया मोड़: : आदिवासी महिला पार्षद के अपमान मामले को दबाने ₹2 लाख के 'लेन-देन' की चर्चा;
Shubh Arvind Sharma
Mon, Oct 5, 2026
कटघोरा नगर पालिका विवाद में नया मोड़: आदिवासी महिला पार्षद के अपमान मामले को दबाने ₹2 लाख के 'लेन-देन' की चर्चा;
पीड़ित पार्षद को छोड़ कांग्रेसी अध्यक्ष के बचाव में उतरे कुछ स्थानीय भाजपा नेता, जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने दिखाई थी तल्खी
विशेष संवाददाता, कटघोरा (कोरबा)05 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के नगर पालिका परिषद कटघोरा में अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिला पार्षद श्रीमती राजेश्वरी जात्रा और पालिका अध्यक्ष राज जायसवाल के बीच उपजा विवाद अब एक नए और बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां पीड़ित महिला पार्षद ने अध्यक्ष के खिलाफ जातिसूचक अपमान और दुर्व्यवहार को लेकर 'थाना अजाक कोरबा' में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, वहीं दूसरी तरफ इस मामले को प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए परदे के पीछे एक बड़ा खेल खेले जाने की खबर सामने आ रही है।

जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने दिखाई मुस्तैदी, CMO को लगाई थी जमकर फटकार
इस पूरे विवाद के बीच पीड़ित भाजपा पार्षद श्रीमती राजेश्वरी जात्रा ने भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी के पास पहुंचकर भी न्याय की गुहार लगाई थी। मामले की संवेदनशीलता और अपनी पार्टी की कार्यकर्ता के अपमान को देखते हुए जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने तत्काल तत्परता दिखाई और मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) को आड़े हाथों लेते हुए फोन पर जमकर फटकार लगाई। जिलाध्यक्ष ने प्रशासनिक शिथिलता पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए पीड़ित आदिवासी महिला पार्षद को पूरी तरह न्यायसंगत कार्रवाई करने का ठोस आश्वासन दिया है। जिलाध्यक्ष के इस कड़े रुख से एक बात साफ है कि संगठन का शीर्ष नेतृत्व इस अपमान को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
पार्टी में अंतर्विरोध: जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी एक तरफ, तो तथाकथित स्थानीय नेता दूसरी तरफ!
जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी की इस तत्परता के बावजूद, स्थानीय स्तर पर राजनीति का एक बेहद शर्मनाक और अजीब रंग देखने को मिल रहा है। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से एक बेहद चौंकाने वाली खबर आ रही है कि क्षेत्र के कुछ तथाकथित स्थानीय भाजपा नेताओं ने इस गंभीर मामले को रफा-दफा करने और दबाने का प्रयास शुरू कर दिया है। सूत्रों का दावा है कि इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने और सेटलमेंट कराने के एवज में इन तथाकथित नेताओं द्वारा अध्यक्ष से ₹2 लाख की मोटी रकम ली गई है।
राजनीति का शर्मनाक रंग: अपनी ही पार्टी की पीड़ित पार्षद को छोड़, कांग्रेसी अध्यक्ष को बचाने क्यों दौड़ पड़े भाजपा नेता?
हैरान करने वाली बात यह है कि विवाद का शिकार हुईं शिकायतकर्ता आदिवासी महिला पार्षद स्वयं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं, जबकि आरोपी नगर पालिका अध्यक्ष राज जायसवाल मूल रूप से मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) से हैं। ऐसे में जहां एक तरफ जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी अपनी पार्टी की पार्षद के सम्मान में खड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर के तथाकथित नेता कांग्रेसी अध्यक्ष को बचाने और मामले का 'सेटलमेंट' करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।
कटघोरा के राजनैतिक गलियारों में यह यक्ष प्रश्न तेजी से गूंज रहा है कि आखिर धुर विरोधी विचारधारा होने के बावजूद ये तथाकथित स्थानीय भाजपा नेता अपनी ही पार्टी की महिला सहकर्मी के मान-सम्मान को ताक पर रखकर कांग्रेसी अध्यक्ष के बचाव में ढाल बनकर क्यों खड़े हो रहे हैं? आखिर परदे के पीछे ऐसा क्या 'अंडरस्टैंडिंग का खेल' चल रहा है और इन्हें कांग्रेसी अध्यक्ष से ऐसा कौन सा बड़ा राजनैतिक या आर्थिक लाभ मिल रहा है?
(नोट: सूत्रों से प्राप्त इस ₹2 लाख के लेन-देन और सेटलमेंट की खबर की पुष्टि हमारा चैनल/संस्थान नहीं करता है। यह पूरी जानकारी पूरी तरह से स्थानीय सूत्रों और राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं पर आधारित है।)
अध्यक्ष का पुराना ढर्रा: आवाज दबाने के लिए मनगढ़ंत आरोपों का सहारा!
इस पूरे घटनाक्रम के बीच नगर पालिका अध्यक्ष का पुराना इतिहास भी एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। विदित हो कि इसके पूर्व भी नगर अध्यक्ष ने सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक (Facebook) पर 'शर्मा न्यूज' के संचालक पर ₹1.5 लाख (डेढ़ लाख रुपये) मांगने का संगीन आरोप लगाया था। राजनैतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब भी अध्यक्ष की कमियां या उनके विवाद सामने आते हैं, तो या तो विरोधियों पर कोई मनगढ़ंत व बेबुनियाद आरोप मढ़ दिया जाता है या फिर पैसों का प्रलोभन देकर मामले को शांत कराने (दबाने) की पुरजोर कोशिश की जाती है।
क्या था मूल मामला?
गौरतलब है कि भाजपा की वार्ड क्रमांक 01 की पार्षद श्रीमती राजेश्वरी जात्रा ने आरोप लगाया है कि 15 सितंबर 2026 को जब वे अपने वार्ड के विकास कार्यों (सड़क और नाली निर्माण) को लेकर अध्यक्ष राज जायसवाल के चेंबर में गई थीं, तब अध्यक्ष ने वहां मौजूद उपाध्यक्ष लालबाबू ठाकुर, ठेकेदार अविनाश केसरवानी और संदीप चौबे के सामने उन्हें सार्वजनिक रूप से जातिसूचक गालियां दीं और अपमानित किया। इस घटना के बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर SC/ST Act के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अब इस मामले में जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी की फटकार, ₹2 लाख के कथित लेन-देन और कांग्रेसी अध्यक्ष के लिए स्थानीय नेताओं की 'खास हमदर्दी' के उजागर होने से कटघोरा की राजनीति में भूचाल आ गया है। देखना यह होगा कि इस गंभीर आदिवासी उत्पीड़न के मामले में पुलिस और प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करता है या स्थानीय स्तर पर चल रहा सेटलमेंट का यह खेल भारी पड़ता है।
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कोरबा कटघोरा
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