अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति का बड़ा कदम, : पत्रकारों के दमन के विरोध में DGP के नाम SP को सौंपा शिकायती पत्र
Shubh Arvind Sharma
Wed, Sep 30, 2026
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति का बड़ा कदम, पत्रकारों के दमन के विरोध में DGP के नाम SP को सौंपा शिकायती पत्र
रायपुर / कोरबा: छत्तीसगढ़ के सरगुजा (अंबिकापुर) अंचल में स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों तथा सोशल मीडिया एक्टिविस्टों को निशाना बनाए जाने का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (ABPSS) छत्तीसगढ़ ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP), पुलिस मुख्यालय (PHQ) रायपुर के नाम एक विस्तृत तीन पृष्ठों का आधिकारिक ज्ञापन पुलिस अधीक्षक (SP) कोरबा के माध्यम से प्रेषित किया है।
इस महत्वपूर्ण शिकायती पत्र पर पुलिस कार्यालय की आधिकारिक आवक (रिसीविंग) मुहर भी दर्ज है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद शर्मा और जिला-कोरबा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार साण्डे के नेतृत्व में सौंपे गए इस पत्र में स्थानीय भू-माफियाओं, आर्थिक अपराधियों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त तत्वों द्वारा पत्रकारों की आवाज दबाने के लिए रचे जा रहे सुनियोजित षड्यंत्र का सिलसिलेवार पर्दाफाश किया गया है।
विवाद की मुख्य वजह: 'अनुपम वस्त्रालय' दुष्कर्म मामला और पुलिस की लापरवाही
ज्ञापन के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ अंबिकापुर स्थित 'अनुपम वस्त्रालय' के संचालक द्वारा एक पीड़ित आदिवासी महिला से जुड़ा दुष्कर्म मामला है। इस संवेदनशील प्रकरण की विवेचना में स्थानीय पुलिस द्वारा शुरुआती तौर पर भारी अनियमितता और लापरवाही बरती जा रही थी। जब क्षेत्र के निर्भीक पत्रकारों ने इस प्रशासनिक विफलता और लापरवाही को प्रमुखता से उजागर किया, तब जाकर सरगुजा आई.जी. (IG) के कड़े हस्तक्षेप के बाद तत्कालीन विवेचक (जांच अधिकारी) को निलंबित किया गया और पीड़िता का पूरक कथन दर्ज हो सका।
आदिवासी समाज का अपमान और भाजपा नेता की शह पर ट्रोलिंग का आरोप
पत्र में आरोप लगाया गया है कि पत्रकारों द्वारा सच दिखाए जाने से बौखलाए आरोपी पक्ष के समर्थन में कुछ व्यवसायिक प्रतिनिधि उतर आए। इन तत्वों ने सार्वजनिक रूप से पीड़ित आदिवासी महिला के चरित्र पर लांछन लगाया और संपूर्ण आदिवासी समाज की महिलाओं पर 'एट्रोसिटी एक्ट' (SC/ST Act) का दुरुपयोग करने का अपमानजनक आरोप मढ़ दिया।
इसके विरोध में जब पत्रकारों—जितेंद्र जायसवाल, महिला पत्रकार आकांक्षा टोप्पो, अमित पांडे एवं डिजिटल एक्टिविस्ट प्रो. अकील अहमद अंसारी ने आवाज उठाई, तो भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया की शह और सोशल मीडिया पर टैगिंग के साथ कतिपय असामाजिक तत्वों ने उनके खिलाफ एक संगठित और अश्लील ट्रोलिंग अभियान शुरू कर दिया। इन तत्वों द्वारा पत्रकारों और प्रो. अकील अंसारी के व्यक्तिगत व पारिवारिक जीवन के वर्षों पुराने और कानूनन निराकृत (सुलझ चुके) मामलों को सोशल मीडिया पर उठाकर उन्हें जानबूझकर 'धार्मिक रंग' दिया जा रहा है।
'मॉब लिंचिंग' की साजिश और सर्व आदिवासी समाज का समर्थन
पत्रकार सुरक्षा समिति ने पुलिस प्रशासन को आगाह किया है कि जिन भू-माफियाओं और आर्थिक अपराधियों के हित इस पत्रकारिता से प्रभावित हुए हैं, वे अब एकजुट होकर सोशल मीडिया पर धार्मिक उन्माद भड़का रहे हैं। वे क्षेत्र में 'मॉब लिंचिंग' (भीड़ द्वारा हिंसा) जैसी खतरनाक स्थितियां निर्मित करने का प्रयास कर रहे हैं और पत्रकारों का मनोबल तोड़ने के लिए उन्हें चुन-चुनकर फर्जी व संदेहस्पद मुकदमों में फंसाने की धमकियां दे रहे हैं।
इस रसूखदार दबाव के खिलाफ सर्व आदिवासी समाज (महिला प्रकोष्ठ) भी खुलकर सामने आ गया है और समाज द्वारा पुलिस महानिरीक्षक (IG), सरगुजा रेंज को इस संबंध में एक कड़ा ज्ञापन सौंपा जा चुका है। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि पत्रकार के धर्म, परिवार और चरित्र को ढाल बनाकर कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती दी जा रही है।

DGP और स्थानीय प्रशासन के समक्ष रखी गईं 4 बड़ी मांगें:
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने शिकायती पत्र के माध्यम से निम्नलिखित त्वरित कदम उठाने की मांग की है:
1. बी.एन.एस. (BNS) के तहत कार्रवाई: आई.जी. सरगुजा रेंज को स्पष्ट निर्देश जारी कर इस पूरे संगठित आपराधिक षड्यंत्र और सोशल मीडिया ट्रोलिंग की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर बी.एन.एस. (भारतीय न्याय संहिता) व आई.टी. एक्ट के तहत तुरंत प्राथमिक दर्ज कर कठोर कार्रवाई हो।
2. विवादित कंटेंट हटाना (धारा 69ए): सोशल मीडिया पर धार्मिक उन्माद फैलाने वाले और चरित्र-हनन करने वाले सभी विवादित पोस्ट व कंटेंट को डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखते हुए आई.टी. एक्ट की धारा 69ए के तहत तत्काल इंटरनेट से हटवाया जाए।
3. मुकदमों की CID जांच: बदले की भावना या राजनीतिक रसूख के दबाव में आकर पत्रकारों पर दर्ज कराए गए सभी संदेहस्पद प्रकरणों की समीक्षा सी.आई.डी. (CID) या किसी अन्य स्वतंत्र निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए, ताकि किसी निर्दोष पत्रकार का उत्पीड़न न हो।
4. पत्रकार सुरक्षा कानून लागू हो: राज्य में पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण प्रदान करने के लिए 'पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक 2023' के परिपालन हेतु तत्काल ठोस जमीनी कदम उठाए जाएं और संस्थागत सुरक्षा तंत्र को मजबूत करते हुए प्रभावित पत्रकारों को व्यक्तिगत सुरक्षा दी जाए।
समिति ने पूर्ण विश्वास जताया है कि पुलिस महानिदेशक इस अत्यंत संवेदनशील विषय पर तत्काल स्वतः संज्ञान लेंगे और सरगुजा पुलिस प्रशासन को उचित व निष्पक्ष कार्रवाई हेतु कड़े दिशा-निर्देश जारी करेंगे।
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कोरबा कटघोरा
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