Friday 9th of October 2026

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दुकानदारों ने बयां किया दर्द; सौंदर्यीकरण की वेदी पर चढ़े दर्जनो हरे-भरे पेड़, DFO बोले– "मिली थी अनुमति"

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कटघोरा के जड़गा मोड़ में सड़क सुरक्षा के नाम पर पालिका की कार्रवाई: : दुकानदारों ने बयां किया दर्द; सौंदर्यीकरण की वेदी पर चढ़े दर्जनो हरे-भरे पेड़, DFO बोले– "मिली थी अनुमति"

Shubh Arvind Sharma

Fri, Oct 9, 2026

कटघोरा के जड़गा मोड़ में सड़क सुरक्षा के नाम पर पालिका की कार्रवाई: दुकानदारों ने बयां किया दर्द; सौंदर्यीकरण की वेदी पर चढ़े दर्जनो हरे-भरे पेड़, DFO बोले– "मिली थी अनुमति"

कटघोरा। नगर पालिका परिषद कटघोरा द्वारा जड़गा मोड़ चौक पर की गई हालिया बुलडोजर कार्रवाई को लेकर स्थानीय छोटे दुकानदारों और व्यापारियों का दर्द छलक उठा है। प्रशासन इस पूरी मुहिम को सड़क सुरक्षा, यातायात दुरुस्त करने और भगवान सहस्रबाहु की प्रतिमा स्थापना के भूमिपूजन के बाद चौक के सौंदर्यीकरण से जोड़कर देख रहा है। लेकिन सालों से यहाँ दुकान चलाकर अपने परिवार का पेट पाल रहे दुकानदारों ने पालिका पर गंभीर भेदभाव का आरोप लगाया है। वहीं, इस सौंदर्यीकरण की आड़ में पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुँचाया गया है।

सौंदर्यीकरण की आड़ में पर्यावरण की अनदेखी, दर्जनों पेड़ कटे:

जड़गा मोड़ चौक को नया रूप देने और सड़कों को चौड़ा करने के नाम पर मार्ग के किनारे लगे दर्जनों विशाल और हरे-भरे पेड़ों की बेरहमी से बलि चढ़ा दी गई।

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ आस्था और विकास की बात की जा रही है, तो दूसरी तरफ दशकों पुराने पेड़ों को काटकर पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ा जा रहा है

इस संबंध में जब वन विभाग का रुख जाना गया, तो कटघोरा डीएफओ (DFO) ने स्पष्ट किया कि उक्त पेड़ों को नियमविरुद्ध नहीं काटा गया है। विकास कार्य और जन सुरक्षा की अनिवार्यता को देखते हुए विभाग द्वारा नियमानुसार पेड़ काटने की बकायदा आधिकारिक अनुमति प्रदान की गई थी।

सालों पुरानी रोजी-रोटी पर संकट, पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं:

प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि वे जड़गा मोड़ पर दशकों से छोटी-मोटी दुकानें संचालित कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। पालिका ने अचानक उनके निर्माणों को मलबे में तब्दील कर दिया।

दुकानदारों ने रोष जताते हुए कहा कि प्रशासन ने दुकानें पीछे खिसकाने (सिफ्ट करने) की बात तो कही, लेकिन इसके लिए कोई पुख्ता जमीन या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी। इस आधी-अधूरा कार्रवाई से उनके व्यापारिक ढांचे पूरी तरह टूट गए हैं, जिससे उनके सामने परिवार पालने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

नोटिस की मियाद पर सवाल और बड़े रसूखदारों को संरक्षण का आरोप:

हालांकि पालिका अधिकारियों का दावा है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले लिखित नोटिस थमाया गया था और मियाद खत्म होने के बाद ही यह कदम उठाया गया।

इसके विपरीत, दुकानदारों का आरोप है कि यह नोटिस महज एक कागजी औपचारिकता थी, जिसमें उन्हें संभलने या अपना सामान सुरक्षित हटाने तक का पर्याप्त समय नहीं मिला।

छोटे व्यापारियों ने सीधा आरोप लगाया कि कानून का डंडा सिर्फ गरीबों पर चला है। जड़गा मोड़ के रसूखदार और रसूख रखने वाले बड़े दुकानदारों के पक्के अतिक्रमणों को नोटिस मिलने के बाद भी छुआ तक नहीं गया, जो प्रशासन की नीयत पर बड़े सवाल खड़े करता है।

सड़क सुरक्षा की आड़ में पक्षपात, अधिकारियों ने साधी चुप्पी:

जहाँ एक तरफ अधीनस्थ अधिकारियों ने दुकानें उजाड़ने की बात से पल्ला झाड़ते हुए इसे केवल सड़क सुरक्षा (Road Safety) के तहत दुकानों को पीछे करने की सुधारात्मक कार्रवाई बताया है, वहीं पीड़ित दुकानदार इसे सीधे तौर पर उजाड़ने की साजिश मान रहे हैं।

इस पूरे विवाद और भेदभाव के आरोपों पर जब नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) से जवाब मांगने का प्रयास किया गया, तो वे मीडिया और जनता के तीखे सवालों का सामना करने से बचते नजर आए। सीएमओ की इस चुप्पी ने पीड़ित दुकानदारों के आक्रोश को और भड़का दिया है।

फिलहाल, अपनी आजीविका छिनने और पर्यावरण की इस अनदेखी से नाराज जड़गा मोड़ के दुकानदार और ग्रामीण एकजुट हो रहे हैं। प्रभावितों का साफ कहना है कि यदि प्रशासन ने निष्पक्षता से जांच नहीं की और रसूखदारों के अतिक्रमण पर कार्रवाई करते हुए गरीबों को उचित जगह नहीं दी, तो वे उग्र आंदोलन और कानूनी रास्ता अख्तियार करने को विवश होंगे।

Tags :

कोरबा कटघोरा

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