पाईपलाइन महाघोटाले पर एसडीएम का बड़ा एक्शन; : त्वरित संज्ञान लेकर तहसीलदार को सौंपी कमान,जांच के दिए सख्त निर्देश, भ्रष्ट अधिकारियों में मची खलबली!
Shubh Arvind Sharma
Wed, Oct 14, 2026
पाईपलाइन महाघोटाले पर एसडीएम का बड़ा एक्शन; त्वरित संज्ञान लेकर तहसीलदार को सौंपी कमान,जांच के दिए सख्त निर्देश, भ्रष्ट अधिकारियों में मची खलबली!

कटघोरा (कोरबा)। नगर पालिका परिषद कटघोरा के वार्ड क्रमांक 05 (नवागांव) में पाइपलाइन विस्तार के नाम पर चल रहे लाखो करोड़ों के वित्तीय और तकनीकी खेल पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी एसडीएम (SDM) कटघोरा ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शिकायतकर्ता अनिल अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत किए गए पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्यों, सरकारी पत्रों में किए गए झूठे दावों और पालिका अधिकारियों की 'लीपापोती' को गंभीरता से लेते हुए, तेजतर्रार एसडीएम ने इस पूरे महाघोटाले पर तत्काल प्रभाव से बड़ा एक्शन लिया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष प्रशासनिक जांच के लिए फाइल सीधे तहसीलदार कटघोरा को मार्क करते हुए लिखित आदेश जारी कर दिया है। एसडीएम के इस हंटर से पालिका के भीतर बैठे भ्रष्ट कारिंदों और तकनीकी अमले में 'काटो तो खून नहीं' जैसी स्थिति निर्मित हो गई है।

गुमराह करने की साजिश नाकाम, एसडीएम ने भांप लिया 'रात का खेल'
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, नगर पालिका के जिम्मेदार आला अधिकारियों और संबंधित उप-अभियंता (सब-इंजीनियर) ने इस तकनीकी गड़बड़ी को छुपाने और फाइलों में हेरफेर कर बचने का पूरा जाल बुना था। अधिकारियों ने 14 अगस्त 2026 की उस झूठी विभागीय रिपोर्ट का भी सहारा लेने की कोशिश की, जिसमें कागजों पर काम को 'शत-प्रतिशत पूर्ण' बताकर उच्च अधिकारियों और जनता की आंखों में धूल झोंकी गई थी।
परंतु, कटघोरा एसडीएम ने 'दूध का दूध और पानी का पानी' करने के लिए नगर पालिका के ही दागी तकनीकी अमले को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारी (तहसीलदार) को कमान सौंपकर यह साफ कर दिया है कि एक ही रूट पर आधा-अधूरा ओ.पी.वी.सी. पाइप बिछाने और फिर उसी के समानांतर 'रात के अंधेरे में जेसीबी चलाकर' लोहे की नई पाइपलाइन बिछाने के इस 'डबल गेम' का सच बहुत जल्द बेनकाब होकर रहेगा।

जांच के दायरे में उप-अभियंता, भौतिक सत्यापन से खुलेगा राज
एसडीएम कटघोरा के सख्त निर्देशानुसार, तहसीलदार की अगुवाई में गठित होने वाली जांच टीम अब सीधे मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन और माप पुस्तिका (M.B. Book) का मिलान करेगी। एसडीएम के आदेश पर जांच में मुख्य रूप से इन तीन बड़े बिंदुओं को शामिल किया गया है:
1. कागजों पर 'पूर्ण' का खेल: यदि नगर पालिका की आधिकारिक रिपोर्ट में काम पहले ही पूर्ण हो चुका था और पैसे आहरित हो गए थे, तो धरातल पर आज तक जनता को पानी की एक बूंद भी क्यों नहीं नसीब हुई?
2. समानांतर लाइन का अवैध खेल: स्वीकृत एस्टीमेट के विरुद्ध बिना किसी नए प्रशासनिक व वित्तीय आदेश के समानांतर लोहे (डी.आई.) की पाइपलाइन किस कानून के तहत बिछाई जा रही है?
3. उप-अभियंता की नीयत: उप-अभियंता द्वारा खुद के ही पास किए गए पाइप को बाद में अचानक 'गुणवत्ता विहीन' बताने के पीछे क्या आपराधिक और वित्तीय हेरफेर की नीयत छिपी थी?

दोषी पाए जाने पर तत्काल निलंबन और FIR तय!
शिकायतकर्ता अनिल अग्रवाल ने एसडीएम कटघोरा के इस त्वरित और निष्पक्ष एक्शन का पुरजोर स्वागत करते हुए अपनी उस खुली चुनौती को दोहराया है कि 'सांच को आंच क्या'। उन्होंने साफ कहा है कि, "यदि एसडीएम के निर्देश पर हो रही इस तहसीलदार स्तर की जांच में नगर पालिका के इस काले कारनामे का भंडाफोड़ होता है, तो जनता के खून-पसीने की कमाई का दुरुपयोग करने वाले संबंधित दोषी अधिकारियों और उप-अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ गबन व धोखाधड़ी की विभिन्न गैर-जमानती धाराओं के तहत तत्काल FIR दर्ज कर जेल भेजा जाए।"
एसडीएम द्वारा सीधे तहसीलदार को जांच मार्क किए जाने के बाद से कटघोरा नगर पालिका के गलियारों में सन्नाटा पसरा हुआ है, और उन फाइलों को खंगाला जा रहा है जिन्हें अब तक दबाकर रखा गया था। अब क्षेत्र की जनता की नजरें तहसीलदार द्वारा एसडीएम को सौंपी जाने वाली निष्पक्ष जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि वे इस संगठित भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को किस तरह बेनकाब करते हैं।
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कोरबा कटघोरा
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