Monday 22nd of June 2026

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पैतृक भूमि को चारागाह बताकर बेदखल करने की रची जा रही साजिश, गंभीर आरोप

सरपंच व उनके गुर्गों की प्रताड़ना से तंग बेवा महिला ने की न्याय की मांग..

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बेवा महिला की शिकायत से तिलमिलाई सरपंच! : पैतृक भूमि को चारागाह बताकर बेदखल करने की रची जा रही साजिश, गंभीर आरोप

Shubh Arvind Sharma

Sun, Jun 21, 2026

बेवा महिला की शिकायत से तिलमिलाई सरपंच! पैतृक भूमि को चारागाह बताकर बेदखल करने की रची जा रही साजिश, गंभीर आरोप

कोरबा/पौड़ी उपरोड़ा। ग्राम पंचायत अमलढिहा में एक वृद्ध विधवा महिला की पैतृक भूमि को लेकर सरपंच और पंचायत प्रशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 70 वर्षों से अपने पूर्वजों की जमीन पर काबिज और झोपड़ी बनाकर गुजर-बसर कर रही पीड़ित महिला को बेदखल करने के लिए अब तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। महिला द्वारा इस प्रताड़ना की शिकायत उच्चाधिकारियों से करने के बाद बौखलाई सरपंच अब मनगढ़ंत आरोपों के सहारे सोशल मीडिया पर खुद को पाक-साफ साबित करने की कोशिश में जुट गई हैं।

बेवा महिला अपने पूर्वजो के काबिज़ भूमि पर बने झोपड़ी नुमा घर मे रहकर अपने तीन बेटियों का विवाह कर चुकी है और एक बेटी अविवाहित है।लम्बे समय से बेवा महिला के पूर्वज उक्त भूमि पर रहते चले आ रहे हैं।जिनके अवशेष आज भी मौजूद हैं।वर्तमान में बेवा महिला उक्त भूमि पर झोपड़ी बनाकर अपनी अविवाहित पुत्री के साथ रहकर खेती किसानी कर जीवनयापन कर रही है।

जानकारों के मुताबिक, पीड़ित बेवा महिला के पूर्वज दशकों से इस भूमि पर काबिज हैं, जिसके साक्ष्य और मलबे आज भी मौके पर मौजूद हैं। हद तो यह है कि पूर्व में रेल कॉरिडोर निर्माण के दौरान इसी पैतृक कब्जे की भूमि का कुछ हिस्सा अधिग्रहित किया गया था, जिसका बाकायदा मुआवजा भी रेलवे विभाग द्वारा जारी किया गया था। जिसके लिए बेवा महिला के पति स्व. मोहन लाल ने कड़ा संघर्ष किया था। ये इस बात का परिचायक है कि बेवा महिला के पूर्वज अविभाजित मध्यप्रदेश व पश्चिमी बरार जो पहले नागपुर के क्षेत्राधिकार में मध्यप्रदेश सामिल रहा है तथा वर्तमान में मध्यप्रदेश से पृथक होकर छत्तीसगढ़ राज्य वर्ष 2001-02 में अपने अस्तित्व में आया।ईस्ट इंडिया कंपनी के समय देशी रियासते छोटी छोटी गणों के रूप में स्थानीय आदिवासी राजाओं को सौप दी गई थी।इसमें पेंड्रा के जमीदार लाल अमोल सिंह का 440 गावो पर आधिपत्य रहा।जिसमे गढ़ उपरोड़ा जो कि वर्तमान में पौड़ी उपरोड़ा छुरी रियासत तथा तुमान के आसपास मौजूद था।जिसके अवशेष आज भी तुमान छुरी गढ़ उपरोड़ा और पाली में जमीदारो के भवन व उनके अवशेष प्रमाणित रूप से विद्यमान है।तब ऐसी दशा में ग्राम अमलदिहा की सरपंच तथाकथित व कतिपय गुंडा किस्म के लोगो को संरक्षण देकर उन्हें आर्थिक लाभ पहुचा कर कवर्धा जैसे हालात निर्मित करने की कोशिश कर रही है।

जहां स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आर्थिक लाभ के लिए बाहरी रोहिंग्या मुसलमानों को संरक्षण देकर बसाया था जो समय समय पर साम्प्रदायिक भावनाओ को छिन्न भिन्न करते हुए सनातनी हिंदुओ के लिए नासूर बन गए थे,जिसे बमुश्किल पुनः वर्तमान भाजपा सरकार के द्वारा श्री विजय शर्मा उप मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के अथक प्रयास से पुनः सनातन धर्म स्थापित किया।तब पुनः कोरबा जिले के ग्राम अमलढिहा में तथाकथित लोग वर्तमान सरपंच के साथ मिलकर जहर घोलने का काम कर रहे हैं।पुख्ता प्रशासनिक साक्ष्य के बावजूद, सरपंच द्वारा इस पैतृक कब्जे की भूमि को 'सरकारी चारागाह' बताकर शासन-प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि सरपंच को भूमि के प्राचीन होने पर संदेह है, तो उन्हें यहाँ मौजूद मलबे की "कार्बन डेटिंग'" करा लेनी चाहिए।

मजबूरी का फायदा उठाकर जमीन हथियाने का खेल

बताया जा रहा है कि पति मोहन लाल की आकस्मिक मृत्यु के बाद बेवा महिला पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। वह अपने बच्चों का पेट पालने के लिए पास के ग्राम गुरसिया में रोजी-मजदूरी करने चली गई थी। महिला की इसी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर सरपंच, पंच और उनके कुछ करीबियों ने इस भूमि पर चारागाह प्रस्तावित कर दिया।

बड़ा सवाल: ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में पहले से ही पर्याप्त चारागाह भूमि मौजूद है, जो उपयोग में लाई जा रही है। ऐसे में एक बेसहारा महिला की जमीन पर ही दोबारा चारागाह बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या पंचायत के पास चारागाह के लिए भूमि नही थी.? इससे पहले इसी जमीन पर पंचायत ने आंगनबाड़ी भवन का प्रस्ताव लाकर निर्माण सामग्री भी गिराई गई थी, जो आज भी सड़ रही है। इससे साफ जाहिर होता है कि मंशा विकास की नहीं, बल्कि महिला की जमीन हथियाने की है।

शिकायत से मचा हड़कंप, परदे के पीछे से चल रही चालें

जब पीड़ित महिला अपने बच्चों के साथ वापस लौटी और उसने सरपंच के इन कारनामों की शिकायत उच्च स्तर पर की, तो पंचायत खेमे में खलबली मच गई। आनन-फानन में बैठक बुलाकर महिला के खिलाफ रणनीति तैयार की गई। सरपंच द्वारा पिछले दिनों एक नोटिस भी तैयार किया गया है, लेकिन यह नोटिस पीड़ित महिला तक पहुँचाने के बजाय केवल सरपंच और उनके गुर्गों के बीच ही घूम रहा है। सूत्रों की मानें तो गाँव के कुछ रसूखदार खुद सामने न आकर, महिलाओं और सरपंच पद की आड़ लेकर इस पूरी साजिश को अंजाम दे रहे हैं।

बेवा महिला के हक कब्जे की भूमि पर पुनः चारागाह बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी.? क्या पँचायत में मवेशियों की संख्या बढ़ गई है या अन्य इलाकों से मवेशी लाये गए हैं जिनके लिए पूर्व से मौजूद चारागाह कम पड़ गया है.? पँचायत को यह विषय स्पष्ट करना पड़ेगा.? क्योंकि कहि ऐसा तो नही है कि सुदूर वनांचल क्षेत्र अमलढिहा से झारखंड व अन्य राज्यो को बूचड़खाने हेतु मवेशियों की सप्लाई व तस्करी करने हेतु भविष्य में उपयोग लाये जाने हेतु प्रयोजन की रूपरेखा चारागाह के माध्यम से तैयार तो नही किया जा रहा.? यह चिंतन का विषय है।लार्ड डलहौजी की हड़प नीति जो अंग्रेजी शासन काल मे महारानी लक्ष्मीबाई को झलकारी बाई के साथ अपने प्राणों की आहुति देकर चुकानी पड़ी थी।उसी तर्ज पर कही वर्तमान सरपंचिंन मनोज बाई व उनके कतिपय गुंडे बदमाशो के द्वारा रोजी मजदूरी करके अपने दो अविवाहित पुत्रियों के विवाह हेतु संकटो से जूझ रही इस बेवा महिला चंदनबाई जो गुरसिया चले जाने से उसकी बंद पड़ी झोपड़ी व बाड़ी जो मुख्यमार्ग से लगी हुई है उसको हड़पने की साजिश जिसे सरपंचिंन, कोटवार व सचिव मिलकर कर रहे हैं से निपटने के लिए अपनी झोपड़ी व बाड़ी को बचाने के लिए बेवा चंदन बाई को अपने दोनों नाबालिक पुत्रियों के साथ अपने प्राणों की आहुति देकर तो नही चुकानी पड़ेगी..?

सरपंच पर भ्रष्टाचार के अन्य गंभीर आरोप; सरकारी संपत्ति बेचने का खेल

अमलढिहा की सरपंच की कार्यशैली पहले से ही विवादों में है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार:

शासकीय संपत्ति की अवैध बिक्री:

पिछले दिनों आए आंधी-तूफान में गोठान के शेड और टिन की चादरें उड़ गई थीं। आरोप है कि महिला सरपंच ने बिना किसी शासकीय अनुमति के इन टिन-शेड्स को अवैध रूप से बाजार में बेच दिया, जो कि सीधे तौर पर शासकीय संपत्ति के गबन का आपराधिक मामला है।

गोठान में अवैध वसूली: पशुओं के लिए आरक्षित गोठान परिसर में नियम विरुद्ध तरीके से साप्ताहिक बाजार का आयोजन कराया जा रहा है और वहाँ व्यापारियों से अवैध वसूली का खेल धड़ल्ले से चल रहा है।

संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन

यह पूरा मामला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता/गरिमा से जीने का अधिकार) का खुला उल्लंघन है। एक जनप्रतिनिधि द्वारा पद का दुरुपयोग कर गरीब महिला को दर-दर की ठोकर खाने पर मजबूर करना बेहद निंदनीय है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर अमलढिहा पंचायत की शासकीय भूमि, अवैध कब्जों और सरपंच के वित्तीय कारनामों की उच्चस्तरीय जांच कब तक कराता है। बहरहाल, आर्थिक रूप से कमजोर होने के बाद भी पीड़ित महिला के मजबूत हौसलों ने पंचायत के इस कथित भू-माफिया तंत्र की नींद उड़ा दी है।

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