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सरपंच व उनके गुर्गों की प्रताड़ना से तंग बेवा महिला ने की न्याय की मांग..

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धर्मनारायण तिवारी दरबार मे वृद्ध बेवा महिला ने लगाई गुहार.. : सरपंच व उनके गुर्गों की प्रताड़ना से तंग बेवा महिला ने की न्याय की मांग..

Shubh Arvind Sharma

Fri, Jun 19, 2026

न्यायप्रिय जनरक्षक धर्मनारायण तिवारी दरबार मे वृद्ध बेवा महिला ने लगाई गुहार.. सरपंच व उनके गुर्गों की प्रताड़ना से तंग बेवा महिला ने की न्याय की मांग..

कोरबा:-पुलिस से न्याय की उम्मीद हर उस इंसान को होती है चाहे वो जीवन के किसी भी पड़ाव में विद्यमान हो,पुलिस हर परिस्थिति में पीड़ित को न्याय दिलाने ततपर है,संकल्पित है। न्याय की आश से जुड़ा एक ऐसा विषय कटघोरा पुलिस के दरबार मे आया,जहां एक वृद्ध बेवा महिला जीवन के अंतिम पड़ाव में कष्टमय जीवन से गुजर रही असहाय पीड़ित न्याय की गुहार लगाने पहुची। न्यायप्रिय जनरक्षक कटघोरा थानेदार धर्मनारायण तिवारी ने पीड़ित महिला की तखलीफ़ सुनी और न्यायसंगत कार्यवाही करने की बात कही।

ये पूरा वाक्या थाना कटघोरा अंतर्गत विकासखंड पौड़ी उपरोड़ा है,ग्राम अमलढिहा निवासी वृद्ध बेवा महिला चंदन बाई अपने पैतृक कब्जा की भूमि पर हक की लड़ाई से जूझ रही है।दरअसल ग्राम पंचायत की सरपंच मनोज बाई ने बेवा महिला के नाम पर कार्यालय ग्राम पँचायत अमलढिहा जनपद पंचायत पौड़ी उपरोड़ा जिला कोरबा छ. ग. पत्र क्रमांक/q/ग्रा. पं./ अवैध कब्जा/2026 कब्जा खाली करने बिना तारीख अंकित का नोटिस जारी किया है।नोटिस में उल्लेख है कि शासकीय भूमि चारागाह अमलढिहा खसरा न. 200/1 में अवैध रूप से कब्जा कर मकान बनाया जा रहा है।पँचायत द्वारा मना करने पर निर्माण कार्य बंद नही किया गया।आपको सूचित किया जाता है कि 2 दिवस के भीतर निर्माण कार्य बंद करे, अन्यथा अनुसाशनत्मक कार्यवाही की जाएगी।नोटिस के बाद से बेवा महिला के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई।

वृद्ध बेवा महिला पैतृक कब्जा भूमि पर करीब 70 वर्षो से काबिज रहकर जीवन यापन करते आ रही है।इसकी तीन बेटियां व दो बेटे हैं सभी की शादी हो चुकी है एक बेटी अविवाहित है, हाल ही में बेवा महिला अपनी अविवाहित बेटी व अपने एक बेटे औऱ बहु के साथ रहती है।

पति की मौत के बाद महिला अपने बच्चो के साथ ग्राम गुरसिया में रहकर रोजी मजदूरी करने लगी।इस दौरान ग्राम पंचायत अमलढिहा सरपंच मनोज बाई पंचायत सचिव व कथित जमीन दलालो के साथ मिलीभगत कर बेवा महिला के कब्जे की भूमि को चारागाह की भूमि बताकर अवैध धनराशि शासन से प्राप्त कर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वृद्ध महिला को उसके कब्जे की भूमि से बेदखल करने के आशय से प्रताड़ित कर रही है।

सरपंच के नोटिस में उल्लेख है कि उक्त भूमि चारागाह की भूमि है, जबकि पंचायत में चारागाह की भूमि पूर्व में आरक्षित है और उपयोग की जा रही है।बेवा महिला के 70 वर्षो से काबिज पैतृक कब्जे की भूमि को पँचायत में षड्यंत्र रूपी प्रस्ताव पारित कर चारागाह की भूमि में परिवर्तित कर सरपंच उक्त भूमि को कथित जमीन दलालो के माध्यम से बिक्री कर मोटी आय प्राप्त करने की कथित कहानी गढ़ी जा रही है।ये पूरा सिलसिला बेवा महिला के पति की मौत बाद रचा गया है उसके पूर्व इस भूमि पर न चारागाह था और न किसी प्रकार का विवाद।

बेवा वृद्ध महिला ने जिला कलेक्टर व पौड़ी तहसीलदार के समक्ष पेश होकर अपनी पीड़ा जाहिर की है।बेवा महिला की शिकायत पर जिला कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं।अगर गतल तरीके से बेवा महिला के पैतृक कब्जे की भूमि को षड्यंत्र तरीके से हथियाने का प्रयास किया जा रहा है तो सरपंच व उनके गुर्गों को भारी पड़ सकता हैं।

एक ओर सरकार जनता के लिए आवास योजना चला कर उन्हें घर देने के लिए प्रयासरत है और शासकीय भूमि पर काबिज लोगो को पट्टा देने की योजना चला रही है वही ग्राम पंचायत अमलढिहा की सरपंच सरकार की योजनाओं को धता बताकर बेवा महिला को बेघकर करने की योजना बना रही है, ऐसे कमतर जनप्रतिनिधियों के कारण जनता सरकार को कोसने पर मजबूर हो जाती है।

सूत्र बताते हैं कि ग्राम पंचायत अमलढिहा में बड़े पैमाने पर शासकीय मद की भूमि मौजूद हैं और यहां कथित जमीन दलाल बेहद सक्रिय हैं।जो शासकीय मद की भूमि पर नजर गड़ाये बैठे हैं।मौका मिलते ही राजस्व अधिकारियों से मिलीभगत कर शासकीय मद के भूमि की बिक्री कर मोटी रकम डकार रहे हैं।सूत्र ये भी बताते हैं कि ग्राम सरपंच भी कई स्थानों पर शासकीय मद की भूमि पर कुंडली जमाये बैठी है और गरीब असहाय तबके के लोगो को कानून का भय दिखाकर उनके आशियानों व उनकी रोजी रोटी छीनकर उन्हें प्रताड़ित कर रही है।बेवा महिला भी इनके प्रताड़ना का शिकार हैं।

अब देखना ये है कि बेवा महिला को पुलिस व प्रशासन किस तरह न्याय दिलाती है और शासकीय मद की भूमि में हेराफेरी कर लाभ की मंशा रखने वाले कथित जमीन दलालो व सरपंच पर क्या जांच कार्यवाही होती है? बताया जाता है कि अगर निष्पक्ष जांच हुई तो पंचायत में सरपंच के कारनामो और शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे औऱ कथित खरीदफरोख्त के कई मामले उजागर हो सकते हैं।

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