Thursday 27th of August 2026

ब्रेकिंग

अटल प्रतिमा घोटाला गरमाते ही बैकफुट पर आई निर्माण एजेंसी; नगर पालिका क्षेत्र में ग्राम पंचायत का यह कैसा खेल?

समस्याओं के चक्रव्यूह में फंसी जनता; हर मोर्चे पर मिल रहा धोखा, तलाश है किसी सच्चे खेवनहार की!

जनसमस्याओं के अंबार पर सोए एल्डरमैन, जनता पूछ रही- 'किस बात की मलाई खा रहे हो?'

तेजतर्रार प्रभारी प्रेमचंद साहू ने संभाली कमान, गुंडे-बदमाशों पर कसेगा कानूनी शिकंजा

कंवर को पाली-तानाखार भेजा तो 'माया मिली न राम', कटघोरा में ही हैं 'तुरुप का इक्का'

सुचना

Welcome to the Sharma News, for Advertisement call +91-7879549029

खनिज विभाग की नाक के नीचे रेत माफियाओं का साम्राज्य! : अहिरन नदी का सीना चीरकर रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर रेत पार, अधिकारी गिना रहे “बल की कमी”

Shubh Arvind Sharma

Fri, Jun 5, 2026

खनिज विभाग की नाक के नीचे रेत माफियाओं का साम्राज्य! अहिरन नदी का सीना चीरकर रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर रेत पार, अधिकारी गिना रहे “बल की कमी”

कोरबा/कटघोरा। जिले में अवैध रेत उत्खनन का खेल अब खुलेआम चल रहा है। सरकार के नियम-कायदों को ठेंगा दिखाते हुए रेत माफिया दिन-रात नदियों का सीना चीर रहे हैं, जबकि खनिज विभाग के अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय “बल की कमी” का राग अलापते नजर आ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि विभाग की निष्क्रियता ने रेत माफियाओं के हौसले सातवें आसमान पर पहुंचा दिए हैं।

कटघोरा क्षेत्र की अहिरन नदी इन दिनों अवैध रेत कारोबारियों का सबसे बड़ा अड्डा बन चुकी है। जुराली, आमाखोखरा और महौरा सहित कई घाटों से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरा खेल प्रशासन और खनिज विभाग की जानकारी में हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।

“बल की कमी” या फिर माफियाओं से मिलीभगत?

खनिज विभाग के अधिकारियों का यह कहना कि उनके पास पर्याप्त बल नहीं है, कई सवाल खड़े करता है। यदि विभाग के पास संसाधनों की कमी है तो अवैध उत्खनन रोकने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस की मदद क्यों नहीं ली जा रही? सवाल यह भी उठ रहा है कि कहीं “बल की कमी” का बहाना रेत माफियाओं को खुली छूट देने का माध्यम तो नहीं बन गया है।

सूत्रों का दावा है कि रेत माफियाओं और विभागीय अधिकारियों के बीच गहरी सांठगांठ के कारण ही रात के अंधेरे में भी धड़ल्ले से रेत का अवैध परिवहन जारी है। यही वजह है कि कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति होती है और असली कारोबारी बेखौफ अपना नेटवर्क चलाते रहते हैं।

जनप्रतिनिधि भी घेरे में, सरपंच के ट्रैक्टर पर सवाल

इस पूरे अवैध कारोबार में ग्राम पंचायत रामपुर के सरपंच की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। आरोप है कि उनका ट्रैक्टर भी अवैध रेत परिवहन में इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि जनप्रतिनिधि ही नियमों को ताक पर रखकर अवैध कारोबार में शामिल होंगे तो कानून व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

राजस्व को करोड़ों का नुकसान, नदी पर्यावरण पर संकट

अवैध रेत उत्खनन केवल सरकारी राजस्व की चोरी नहीं है, बल्कि यह नदियों के अस्तित्व और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है। लगातार हो रहे अंधाधुंध खनन से नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है, जलस्तर प्रभावित हो रहा है और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भविष्य में बड़े पर्यावरणीय संकट की आशंका बढ़ रही है।

आखिर कब जागेगा प्रशासन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अवैध उत्खनन की जानकारी विभाग को है, घाटों के नाम तक सबको मालूम हैं और रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर रेत निकल रही है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या खनिज विभाग वास्तव में असहाय है या फिर रेत माफियाओं के सामने जानबूझकर घुटने टेक चुका है?

कटघोरा में रेत माफियाओं का यह बेलगाम खेल प्रशासनिक विफलता की कहानी बयां कर रहा है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करते हैं या फिर “बल की कमी” का बहाना बनाकर माफियाओं को संरक्षण मिलता रहेगा।

Tags :

sharma news

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें