कांग्रेसी नेता विकास सिंह का फूटा गुस्सा; : कटघोरा में बारिश के बीच किया उग्र प्रदर्शन, सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की मांग के बाद भी सीएमओ की 'कुर्सी' सुरक्षित क्यों
Shubh Arvind Sharma
Fri, Aug 7, 2026
कांग्रेसी नेता विकास सिंह का फूटा गुस्सा; कटघोरा में बारिश के बीच किया उग्र प्रदर्शन, सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की मांग के बाद भी सीएमओ की 'कुर्सी' सुरक्षित क्यों?
पुलिस ने संभाला मोर्चा: प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल रहा तैनात, चप्पे-चप्पे पर रखी गई कड़ी नजर।

कटघोरा। आसमान से बरसती आफत के बीच आज कटघोरा की सड़कों पर सियासत का 'जलजला' देखने को मिला। नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी मुद्रिका प्रसाद तिवारी सीएमओ) को पद से हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस नेता विकास सिंह की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने भरी बरसात में कटघोरा एसडीएम कार्यालय के सामने मुख्य मार्ग पर ऐसा उग्र प्रदर्शन किया कि प्रशासनिक अमले के हाथ-पांव फूल गए।पानी में पूरी तरह भीगते हुए सैकड़ों कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने "भाजपा शासनकाल में भ्रष्टाचार बंद करो" के नारों से पूरे इलाके को गुंजा दिया।
इस उग्र प्रदर्शन और भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पूरी तरह मोर्चा संभाल रखा था। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा, जिसने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी मशक्कत की।
यह पूरा बवाल भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा और 'अटल परिसर' निर्माण में हुए भ्रष्टाचार को लेकर है, जहां कांसे की जगह सीमेंट की मूर्ति खड़ी करने का गंभीर आरोप है। इस काले कारनामे के उजागर होने के बाद विकास सिंह के नेतृत्व में पहुंचे कांग्रेसियों ने मूसलाधार बारिश के बीच जमकर हल्ला बोला और भ्रष्ट व्यवस्था के 'परखच्चे उड़ा दिए'।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी कलेक्टर को लिखा था पत्र, फिर भी सीएमओ का 'बाल न बांका'
इस पूरे सियासी ड्रामे में सबसे बड़ा और दिलचस्प मोड़ यह है कि पूर्व में खुद भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने भी कलेक्टर को पत्र देकर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की आधिकारिक मांग की थी।
अब कटघोरा की जनता के बीच यह सवाल 'यक्ष प्रश्न' बनकर तैर रहा है कि आखिर एक अदने से सीएमओ को हटाने के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही आमने-सामने खड़े हैं, दोनों ही दल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, फिर भी उस सीएमओ का बाल भी बांका नहीं हो रहा है। आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है जिसके कारण जिला प्रशासन या नगरीय प्रशासन विभाग सीएमओ पर हाथ डालने से कतरा रहा है?

लिखित 'पंचनामा' और आश्वासन के बाद शांत हुआ आक्रोश
मूसलाधार बारिश और पुलिस के कड़े पहरे के बीच जब कांग्रेसी टस से मस नहीं हुए, तो कटघोरा के नायब तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर आंदोलनकारियों के बीच एक आधिकारिक 'पंचनामा' तैयार किया। लिखित पंचनामे के अनुसार, प्रशासन ने मांग को स्वीकार करते हुए लिखित आश्वासन दिया है कि इस मूर्ति विवाद की जिला एवं संभागीय स्तर पर जांच दल गठित कर निष्पक्ष जांच की जा रही है। अंतिम रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर शासन स्तर से नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस भरोसे को भीड़ के बीच पढ़कर सुनाया गया, जिसके बाद विकास सिंह और कार्यकर्ताओं ने सहमति जताते हुए धरना समाप्त किया।

बड़ा सवाल: आखिर किसका है 'राजनैतिक वरदहस्त'?
सत्तापक्ष के जिला अध्यक्ष के पत्र और विपक्ष के नेता विकास सिंह के इस उग्र प्रदर्शन व चक्काजाम के बाद भी अपनी कुर्सी पर अंगद की तरह जमे इस सीएमओ को देखकर अब गलियारों में खुलेआम चर्चा है कि आखिर किस 'बड़े आका की छतरी' इस अधिकारी को बचाए हुए है? जब दोनों प्रमुख दल एक सुर में हैं, तो फिर आखिर ऐसी कौन सी 'गठजोड़ की मलाई' है जो प्रशासनिक तंत्र को 'धृतराष्ट्र' बनाए बैठी है? विकास सिंह ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस जांच में लीपापोती की गई, तो यह आंदोलन इससे भी भयानक रूप लेकर दोबारा सड़कों पर उतरेगा।

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कोरबा कटघोरा
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