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बेदाग और कड़क टीआई एम.बी. पटेल को फंसाने की साजिश? 'सुपर कॉप' की छवि धूमिल करने का रचा गया चक्रव्यूह!

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कटघोरा थाना कांड में नया मोड़: : बेदाग और कड़क टीआई एम.बी. पटेल को फंसाने की साजिश? 'सुपर कॉप' की छवि धूमिल करने का रचा गया चक्रव्यूह!

Shubh Arvind Sharma

Thu, Aug 6, 2026

कटघोरा थाना कांड में नया मोड़: बेदाग और कड़क टीआई एम.बी. पटेल को फंसाने की साजिश? 'सुपर कॉप' की छवि धूमिल करने का रचा गया चक्रव्यूह!

कोरबा/कटघोरा। कहते हैं कि जब ईमानदारी का सूरज तेज चमकता है, तो भ्रष्टाचार के चमगादड़ों को सबसे ज्यादा तकलीफ होती है। कटघोरा थाने में दो आरक्षकों के निलंबन के बाद जिस तरह से थाना प्रभारी (TI) एम. बी. पटेल की भूमिका पर उंगलियां उठाई जा रही हैं, उसने अब एक नए और गहरे संशय को जन्म दे दिया है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और पुलिस महकमे के अंदरूनी गलियारों में यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि क्या यह पूरा घटनाक्रम वाकई एक प्रशासनिक चूक है, या फिर अपनी ईमानदारी और कड़क जांबाजी के लिए मशहूर टीआई एम.बी. पटेल की साफ-सुथरी छवि को मटियामेट करने की कोई गहरी और सुनियोजित साजिश?

'अंधे कत्ल' सुलझाने वाले 'सुपर कॉप' के खिलाफ अपनों का ही चक्रव्यूह?

थाना प्रभारी एम. बी. पटेल पुलिस महकमे का वह चेहरा हैं, जिनका नाम सुनते ही बड़े-बड़े अपराधियों के पसीने छूट जाते हैं। जिले के कई थानों में अपनी पोस्टिंग के दौरान उन्होंने ऐसे-ऐसे अंधे कत्लों और पेचीदा मामलों की गुत्थी सुलझाई है, जहां बड़े-बड़े खोजी अधिकारी भी हाथ खड़े कर देते थे। कई बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाइयों को अंजाम देकर उन्होंने हमेशा खाकी का मान बढ़ाया है।

अब सवाल यह उठता है कि जिस बेदाग और खूंखार अपराधियों के काल माने जाने वाले टीआई का खुफिया तंत्र इतना मजबूत हो, क्या उनके ही दो मातहत सिपाही इतनी बड़ी हिमाकत अकेले कर सकते हैं? या फिर टीआई साहब की कड़क ईमानदारी से परेशान होकर, उनके रडार पर रहने वाले अपराधियों और भ्रष्ट तत्वों ने मिलकर यह पूरा जाल बुना, ताकि 'साहब' को सीधे लपेटे में लिया जा सके?

'गेहूं के साथ घुन' पीसने की चाल, क्या कप्तान को किया जा रहा गुमराह?

सूत्रों की मानें तो दो आरक्षकों—प्रदीप राठौर और रामधन पटेल—के इस काले कारनामे की आड़ लेकर कुछ निहित स्वार्थी तत्व सीधे थाना प्रभारी की कुर्सी हिलाने के खेल में जुट गए हैं। साजिशकर्ताओं की चाल साफ नजर आ रही है: आरक्षकों के कंधे पर बंदूक रखकर निशाना सीधे टीआई पटेल की बेदाग साख पर लगाया जा रहा है। विभागीय गलियारों में सुगबुगाहट है कि इस मामले को इस तरह से पेश किया जा रहा है ताकि 'गेहूं के साथ घुन भी पिस जाए' और कप्तान सिद्धार्थ तिवारी की सख्त छवि का फायदा उठाकर बेदाग टीआई को रडार पर ला खड़ा किया जाए। क्या अपराधियों की कमर तोड़ने वाले इस जांबाज अफसर के खिलाफ खुद पुलिस महकमे के कुछ जयचंद और बाहरी सिंडिकेट मिलकर यह गंदा खेल खेल रहे हैं?

टीआई पटेल की लोकप्रियता से किसे थी परेशानी?

एम. बी. पटेल अपने काम के दम पर जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। उनके थानों में आम आदमी को न्याय मिलता है और गुंडे-बदमाशों की जगह सीधे सलाखों के पीछे होती है। ऐसे में यह आशंका पूरी तरह सच साबित होती दिख रही है कि कटघोरा क्षेत्र के अवैध कारोबारियों और उनके मददगारों को पटेल की मौजूदगी खटक रही थी। सादे कपड़ों में वसूली का यह पूरा स्वांग शायद इसीलिए रचा गया ताकि इसकी आंच सीधे थाना प्रभारी तक पहुंचे और उनका तबादला कराया जा सके। इस बड़ी साजिश का पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है, क्योंकि अगर एक ईमानदार और रिकॉर्डधारी अफसर को इस तरह बलि का बकरा बनाया गया, तो अपराधियों के हौसले सातवें आसमान पर पहुंच जाएंगे।

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कोरबा कटघोरा

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