अटल जी के अपमान पर देश चुप क्यों? : उप अभियंता सस्पेंड, पर असली 'मास्टरमाइंड' CMO को अभयदान क्यों? गरजी कांग्रेस!
Shubh Arvind Sharma
Fri, Aug 7, 2026
अटल जी के अपमान पर देश चुप क्यों? उप अभियंता सस्पेंड, पर असली 'मास्टरमाइंड' CMO को अभयदान क्यों? गरजी कांग्रेस!

कटघोरा/कोरबा (वेब डेस्क)। देश के सबसे बड़े सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजे गए श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा निर्माण में कटघोरा नगर पालिका के अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलकर गंगा नहाने जैसी बेशर्मी दिखाई है। यह मामला 28 जुलाई से लगातार सुर्खियों में है। 'अटल परिसर' योजना के तहत जिस महापुरुष की ब्रॉन्ज (कांस्य) की भव्य मूर्ति लगनी थी, वहां भ्रष्टाचार की बहती गंगा में हाथ धोते हुए इन आस्तीन के सांपों ने सीमेंट-कंक्रीट का पुतला खड़ा कर दिया और उस पर नकली चमक वाला मेटल पेंट पोतकर सबकी आंखों में धूल झोंकने का घटिया काम किया।
जब मामला पूरी तरह तूल पकड़ने लगा और अपनी साख बचानी भारी पड़ने लगी, तो प्रशासन ने आनन-फानन में 31 जुलाई 2026 को संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास (इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर अटल नगर) के जरिए उप अभियंता (Sub Engineer) चंद्रप्रकाश जायसवाल को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया।

दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पूरे देश को उठानी थी आवाज!
अटल बिहारी वाजपेयी जी किसी एक राजनीतिक दल की बपौती नहीं थे, वे पूरे राष्ट्र के गौरव और भारत के 'रत्न' थे। उनके सम्मान और अस्मिता के साथ हुए इस भद्दे खिलवाड़ पर सत्तापक्ष हो या विपक्ष, या फिर देश का कोई भी आम नागरिक—हर किसी का खून खौल उठना चाहिए था और पूरे देश को एक सुर में आवाज बुलंद कर देनी थी। लेकिन अफ़सोस, देश की इस महान धरोहर के अपमान पर आज कई बड़े-बड़े सूरमा होंठ सिलाये बैठे हैं और अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में मसरूफ हैं। इस राष्ट्रीय जन-अपमान पर कई रसूखदारों ने काटो तो खून नहीं जैसी कायरतापूर्ण चुप्पी साध रखी है।

कहाँ छिपे हैं देश के बड़े-बड़े संगठन, क्यों नहीं गूंज रही आवाज.?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह है कि आखिर देश के बड़े-बड़े संगठन आज कहाँ छिपे बैठे हैं? जो संगठन जरा-जरा सी बात पर आसमान सिर पर उठा लेते हैं और राष्ट्रवाद का ढोल पीटते हैं, आज भारत रत्न के इस सरेआम अपमान पर उनकी आवाज क्यों नहीं गूंज रही है? क्या उनका राष्ट्रवाद और अटल जी के प्रति सम्मान सिर्फ चुनावों तक ही सीमित था? श्रद्धेय अटल जी, जिन्हें भाजपा का पितृ पुरुष और छत्तीसगढ़ का निर्माता माना जाता है, उनकी प्रतिमा के नाम पर 14 लाख रुपये डकार लिए गए, लेकिन इन बड़े-बड़े संगठनों ने धृतराष्ट्र की तरह आँखों पर पट्टी बांध रखी है। इनका यह रहस्यमयी मौन साफ इशारा करता है कि इन्हें देश के गौरव से ज्यादा अपनी राजनीतिक गोटी सेट करने की फिक्र है।

छोटे प्यादे की बलि, वजीर को बचाने की नाकाम कोशिश!
प्रशासन को शायद गलतफहमी थी कि एक उप अभियंता पर निलंबन की कार्रवाई का पर्दा डालकर वे जनता के गुस्से को शांत कर देंगे और मामला रफा-दफा हो जाएगा। लेकिन इस लीप-पोती और आंखों में धूल झोंकने वाली चालाकी ने मामले को सुलझाने के बजाय और उलझा दिया है।
* CMO को अभयदान क्यों?: निर्माण कार्य की इस काली कड़ी से जुड़े सबसे मुख्य किरदार, यानी कटघोरा नगर पालिका के CMO (मुख्य नगर पालिका अधिकारी) को प्रशासन ने जादुई तरीके से क्लीन चिट दे दी है?
* अंधेर नगरी का खेल: नियम साफ कहते हैं कि नगर पालिका के भीतर होने वाली किसी भी निर्माण कार्य की फाइल और टेंडर प्रक्रिया बिना CMO की टेबल से गुजरे पास हो ही नहीं सकती। जब अंतिम हस्ताक्षर और पूरी जिम्मेदारी CMO की थी, तो गाज सिर्फ एक छोटे इंजीनियर पर ही क्यों गिरी? क्या बड़े साहब की जेबें गर्म थीं?

मौन व्यवस्था के बीच युवा शेर विकास सिंह ने ठोकी ताल
जहाँ सत्तापक्ष के नेता और बड़े संगठन इस आधे-अधूरे एक्शन पर बगलें झांक रहे हैं और कायरतापूर्ण चुप्पी साधे हुए हैं, वहीं कांग्रेस के युवा जिलाध्यक्ष विकास सिंह ने इस सोई हुई व्यवस्था को लाठी मारकर जगाने का काम किया है। उन्होंने अकेले ही भ्रष्टाचारियों के खिलाफ मोर्चा खोलकर उनकी नींद उड़ा दी है।

विकास सिंह ने इस घोटाले के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए दहाड़ मारी:
"अटल जी पूरे देश के थे, उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ होने पर जो संगठन आज दुबक कर बैठे हैं, वे इतिहास के गुनहगार हैं। जिन ठेकेदारों और अफसरों ने अपनी जेबें भरने के लिए इतनी महान शख्सियत का अपमान करने की जुर्रत की है, उन्हें दिन में तारे दिखा दिए जाएंगे। नगर पालिका का बच्चा-बच्चा जानता है कि बिना CMO की रजामंदी के 14 लाख का टेंडर पास नहीं हो सकता। इस महाघोटाले के असली सूत्रधार CMO को अभयदान देकर प्रशासन क्या साबित करना चाहता है? जब तक CMO पर FIR दर्ज कर उसे जेल की हवा नहीं खिलाई जाती, कांग्रेस चैन से नहीं बैठेगी। हम इस चोर-चोर मौसेरे भाई वाले खेल की ईंट से ईंट बजा देंगे!"

पानी सिर से ऊपर, अब उखड़ेगी भ्रष्टाचार की जड़ें!
एकतरफा कार्रवाई के इस प्रशासनिक खेल से स्थानीय जनता और विपक्ष का गुस्सा अब सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। जनता पूछ रही है कि आखिर किस बड़े राजनेता या रसूखदार के इशारे पर मुख्य आरोपी अधिकारी को बचाया जा रहा है? अगर प्रशासन ने तुरंत अपनी इस चालबाजी को सुधारकर मुख्य किरदार CMO और भ्रष्ट ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का हंटर नहीं चलाया, तो कटघोरा की सड़कों पर ऐसा उग्र जन-आंदोलन शुरू होगा जिसे संभालना सरकार के बस से बाहर हो जाएगा।
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