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जुराली मे भूमि का बिना नामांतरण फर्जी हक त्याग..! : राजस्व प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल...

Shubh Arvind Sharma

Sun, Apr 26, 2026

जुराली मे भूमि का बिना नामांतरण फर्जी हक त्याग..!राजस्व प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल...

कटघोरा/पौड़ी उपरोड़ा:

ग्राम जुराली में भूमि खसरा क्रमांक 457/1 (रकबा 0.246 हे.) को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि बिना विधिवत नामांतरण प्रक्रिया पूरी किए, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हक त्याग कर जमीन का रिकॉर्ड बदल दिया गया और बाद में लाखो की जमीन की खरीद-फरोख्त भी कर दी गई। इस पूरे मामले ने राजस्व अमले की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फर्जी हक त्याग और रिकॉर्ड सुधार का आरोप

शिकायतकर्ता का दावा है कि जुराली निवासी शाहिद मोहम्मद द्वारा अपनी बहनों के कथित हस्ताक्षर 50 रुपये के स्टाम्प पेपर पर लेकर नोटरी के माध्यम से हक त्याग दिखाया गया है, जबकि नियमानुसार हक त्याग की प्रक्रिया रजिस्टर्ड और विधिवत नामांतरण के बिना मान्य नहीं होती।

आरोप यह भी है कि हल्का पटवारी की मिलीभगत से राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर भूमि को एकतरफा तरीके से शाहिद मोहम्मद के नाम दर्ज करा दिया गया।

सड़क दिखाकर बढ़ाई गई जमीन की कीमत?

शिकायत में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि भूमि की चौहद्दी में हेरफेर कर उसे सड़क से लगी हुई दर्शाया गया, जबकि वास्तविक स्थिति में जमीन सड़क से काफी दूर और लगभग 15 फीट गड्ढे में स्थित है।

आरोप है कि इस बदलाव के पीछे भविष्य में मुआवजा लाभ दिलाने की संभावित योजना भी शामिल हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

लाखो के सौदे और विवादित लेन-देन

जानकारी के अनुसार, उक्त भूमि का 63 लाख रुपये में तानाखार निवासी असीम खान से सौदा कर पंजीयन कराया गया है। इससे पहले भी इसी जमीन को लेकर दो अलग-अलग खरीदारों के साथ सौदे हुए थे, जो कथित रूप से जमीन की वास्तविक स्थिति (रास्ता और चौहद्दी विवाद) के कारण विफल हो गए थे।

राजस्व अमले पर सवाल

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पटवारी स्तर पर मिलीभगत कर गलत चौहद्दी तैयार की गई और शासन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

जांच की मांग तेज

शिकायतकर्ता ने इस मामले की शिकायत कलेक्टर और मुख्यमंत्री तक भेजते हुए उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

अब निगाहें प्रशासन पर

यह मामला फिलहाल आरोपों और शिकायतों के दायरे में है। वास्तविकता क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड, नामांतरण प्रक्रिया और राजस्व अमले की पारदर्शिता पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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