अटल प्रतिमा के ‘सीमेंट खेल’ से बैकफुट पर भाजपा, : नगर पालिका के ‘कांग्रेसी राज’ में घोटालों ने बढ़ाई किरकिरी; प्रशासन मौन!
Shubh Arvind Sharma
Fri, Aug 21, 2026
कटघोरा में सियासी बवंडर: अटल प्रतिमा के ‘सीमेंट खेल’ से बैकफुट पर भाजपा, नगर पालिका के ‘कांग्रेसी राज’ में घोटालों ने बढ़ाई किरकिरी; प्रशासन मौन!
कटघोरा। आगामी विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े कटघोरा में इस समय राजनीतिक शुचिता का पूरी तरह जनाजा उठ चुका है। क्षेत्र में चुनावी बिसात बिछने से पहले ही दोनों प्रमुख राजनीतिक दल—भाजपा और कांग्रेस—कथनी और करनी के फेर में फंसकर जनता की अदालत में कटघरे में खड़े नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा के नाम पर हुए कथित ‘सीमेंट खेल’ ने भाजपा कुनबे के पैरों तले जमीन खिसका दी है, वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका परिषद में कांग्रेसी सत्ता के साए में लगातार उजागर हो रहे भ्रष्टाचार के मामलों ने ‘चोर-चोर मौसेरे भाई’ वाली कहावत को चरितार्थ कर दिया है।
संवेदनशील कानूनी पहलुओं और प्रशासनिक जांच के दायरे में रहते हुए, यदि स्थानीय राजनीतिक गलियारों की नब्ज टटोली जाए, तो कटघोरा का मौजूदा सियासी मंजर कुछ इस प्रकार है:

भाजपा: ‘हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और’, अपनों के ही कथित खेल से कुनबा मौन
नगर पालिका क्षेत्र के अटल परिसर में करीब 14 लाख रुपये की सरकारी राशि से स्थापित की गई पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा पहली ही मूसलाधार बारिश में अपना असली रंग दिखा बैठी। ब्रॉन्ज (कांस्य) के नाम पर खड़ी की गई इस प्रतिमा की कलई जैसे ही उतरी, अंदर का कंक्रीट और सीमेंट का ढांचा चीख-चीखकर धांधली की गवाही देने लगा।
* कथित ‘भाजपाई’ ठेकेदारों पर उंगली: इलाके में यह चर्चा पूरी तरह आम है कि इस निर्माण कार्य की मलाई संगठन के शीर्ष चेहरों के करीबी और कथित रसूखदार ठेकेदारों ने काटी है। अपनों के ही इस ‘घाट-घाट का पानी पीना’ और ‘बहती गंगा में हाथ धोना’ वाला रवैया स्थानीय भाजपा को भारी पड़ गया है, जिससे वह पूरी तरह बैकफुट पर आ गई है।
* सांप सूंघ गया भाजपा कुनबे को: राष्ट्रवाद और शुचिता का ढोल पीटने वाले भाजपा कुनबे को इस कथित घोटाले के बाद जैसे सांप सूंघ गया है। बदनामी के डर और भीतरी खींचतान के कारण स्थानीय दिग्गज नेताओं ने ‘एक चुप्पी, सौ सुख’ का रास्ता अख्तियार करते हुए पूरी तरह मौन साध लिया है, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं का हौसला पस्त हो चुका है और वे अंगूठा दिखाते नजर आ रहे हैं।

कांग्रेस: ‘चिराग तले अंधेरा’, नगरीय निकाय में अध्यक्ष की मौजूदगी के बाद भी भ्रष्टाचार की अमरबेल
भाजपा के इस नैतिक पतन पर ‘दूध की धुली’ दिखने की कोशिश कर रही कांग्रेस की हालत भी ‘नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली’ जैसी हो गई है।
* अध्यक्ष की नाक के नीचे खेल: कटघोरा नगरीय प्रशासन (नगर पालिका) के शीर्ष सिंहासन पर वर्तमान में कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष विराजमान हैं। इसके बावजूद, निकाय के भीतर से एक के बाद एक वित्तीय अनियमितताओं और मनमानी के जिन्न बाहर आ रहे हैं, जिसने कांग्रेस के दावों की हवा निकाल दी है।
* जमकर हो रही किरकिरी: कांग्रेसी राज में लगातार उजागर हो रहे भ्रष्टाचार के मामलों ने पार्टी की छवि पर ऐसा कालिख पोता है कि स्थानीय स्तर पर कांग्रेस की जमकर किरकिरी हो रही है। विपक्षी दल के भ्रष्टाचार पर उंगली उठाने वाली कांग्रेस खुद ‘कांच के घर में रहकर दूसरों पर पत्थर फेंकने’ की गलती कर बैठी है।
* घोटालों के बोझ से बेदम: अपनी ही सत्ता वाले निकाय में मचे इस अंधेरगर्दी के कारण स्थानीय कांग्रेसी नेतृत्व घोटालों के इस भारी-भरकम बोझ तले दबा नजर आ रहा है। आलम यह है कि भाजपा को पूरी तरह पटखनी देने का सुनहरा मौका होने के बावजूद कांग्रेस खुलकर हमलावर नहीं हो पा रही है और उसके नेता बगलें झांकते नजर आ रहे हैं।

प्रशासन की भूमिका: ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’, दोनों तरफ मेहरबान है सिस्टम
इस पूरे सियासी ड्रामे में स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी किसी राजनीति से कम नजर नहीं आ रही है। जांच और कार्रवाई के नाम पर प्रशासन का रवैया पूरी तरह ‘ढाक के तीन पात’ वाला साबित हो रहा है।
* अटल मामले की जांच ठंडे बस्ते में: एक ओर, भारत रत्न अटल जी की प्रतिमा में हुए इतने बड़े फर्जीवाड़े और घोटाले की जांच को कई हफ्ते बीत जाने के बाद भी अभी तक ठंडे बस्ते में डाल कर रखा गया है। हफ्तों की इस सुस्ती के पीछे क्या कोई राजनीतिक दबाव है या रसूखदार ठेकेदारों को आंखों का तारा बनाकर बचाने का खेल, यह आम जनता की समझ से पूरी तरह परे है।
* रहस्य के घेरे में कांग्रेस राज की शिकायतें: दूसरी ओर, नगर पालिका के कांग्रेसी राज में हो रहे ताबड़तोड़ घोटालों की शिकायतें लगातार उच्च शासन तक भेजी जा रही हैं। लेकिन इन शिकायतों पर जमीनी स्तर पर क्या जांच हो रही है, या फाइलें सीधे रद्दी की टोकरी में जा रही हैं, यह एक गहरा रहस्य बना हुआ है। इस गोपनीय सुस्ती की भनक तक किसी को नहीं होने दी जा रही है और प्रशासन कान में तेल डालकर बैठा है।

जनता की अदालत: ‘गेहूं के साथ घुन भी पिसता है’
कटघोरा की प्रबुद्ध जनता इस समय दोनों ही दलों की नौटंकी और प्रशासनिक सुस्ती को बड़े करीब से भांप रही है। जहां एक तरफ भाजपा के रसूखदारों ने अपने ही श्रद्धेय नेता की गरिमा को ताक पर रखकर भ्रष्टाचार का खेल खेला, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेसी प्रशासन और स्थानीय सिस्टम भी भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की बजाय ‘धृतराष्ट्र’ की भूमिका में नजर आ रहे हैं। कानून की चौखट और जांच के खोखले दावों के बीच, कटघोरा का मतदाता अब इस राजनीतिक कीचड़ से इतर एक साफ-सुथरे विकल्प की तलाश में नजर आ रहा है।
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कोरबा कटघोरा
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