टेंडर के 'तालाब' में धांधली का खेल! : भाजपा उपाध्यक्ष ने खोली पोल, 48 घंटे में सीएमओ की 'कमांड' तय
Shubh Arvind Sharma
Tue, Aug 18, 2026
टेंडर के 'तालाब' में धांधली का खेल! भाजपा उपाध्यक्ष ने खोली पोल, 48 घंटे में सीएमओ की 'कमांड' तय
विशेष ब्यूरो, कटघोरा (कोरबा)। नगर पालिका परिषद कटघोरा में विकास कार्यों के नाम पर अंदर ही अंदर चल रहे टेंडर के खेल का भंडाफोड़ हो गया है। वार्ड क्रमांक 4 के सरगबन्द तालाब की निविदा प्रक्रिया में अधिकारियों और चहेतों ने मिलकर जो गंगा नहाई थी, अब उस पर बिलासपुर संभाग के बड़े अफसरों की टेढ़ी नजर पड़ चुकी है। भाजपा जिला उपाध्यक्ष की तीखी शिकायत के बाद विभागीय गलियारों में ऐसा सांप लूंघा है कि भ्रष्टाचार को दबाने में जुटे अफसरों के हाथ-पांव फूल गए हैं। बिलासपुर संयुक्त संचालक कार्यालय ने कड़ा चाबुक चलाते हुए सीधे कटघोरा मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) को घुटनों पर ला दिया है और महज 2 दिन के भीतर पूरी कुंडली के साथ हाजिर होने का फरमान सुनाया है।
टेंडर की मलाई काटने वालों पर चली गाज
कटघोरा पालिका के भीतर अंधेर नगरी चौपट राजा वाला हाल बनाकर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों को यह अंदाजा भी नहीं था कि सरगबन्द तालाब की निविदा में की गई लीपापोती इतनी जल्दी गले की हड्डी बन जाएगी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कोरबा के जिला उपाध्यक्ष श्री टीकम पाल ने इस पूरे मामले को लेकर अपनी आस्तीनें चढ़ा ली थीं। उन्होंने बीते 3 अगस्त 2026 को पूरे सबूतों के साथ सीधे बिलासपुर संभाग के आला अधिकारियों के पास धावा बोल दिया। उनकी इस आर-पार की लड़ाई का नतीजा यह हुआ कि संयुक्त संचालक (नगरीय प्रशासन एवं विकास) कार्यालय को मजबूरन एक्शन मोड में आना पड़ा।
बिलासपुर से छूटा 'प्रशासनिक बाण', 2 दिनों का अल्टीमेटम
बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय से जारी पत्र क्रमांक 253/यां.प्र/कटघोरा/2026 ने कटघोरा पालिका प्रशासन की नींद उड़ा दी है। कार्यपालन अभियंता द्वारा जारी इस कड़े आदेश ने सीएमओ को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आदेश में साफ और कड़े शब्दों में कहा गया है कि टेंडर के इस गोरखधंधे पर पर्दा डालने की कोशिश न की जाए।
उच्च कार्यालय ने साफ हिदायत दी है कि:
* आरोपों की वास्तविक वस्तुस्थिति पर दूध का दूध और पानी का पानी करने वाली बिंदुवार रिपोर्ट तैयार की जाए।
* टेंडर की मूल फाइल (नस्ती) की पूरी सत्यापित जन्मकुंडली (छायाप्रति) साथ लगाई जाए।
* इस रिपोर्ट को डाक के भरोसे छोड़ने की घिसी-पिटी चाल नहीं चलेगी; इसे 'विशेष वाहक' (स्पेशल मैसेंजर) के जरिए ठीक 48 घंटे के भीतर सीधे बिलासपुर दफ्तर में लाकर पटकना होगा।
अफसरों की 'चोरी' पकड़ी गई, अब गाज गिरना तय!
आमतौर पर कछुए की चाल से चलने वाले सरकारी महकमे ने जिस तरह बिजली की रफ्तार से 02 दिनों की समय-सीमा तय की है, उससे साफ है कि इस बार दाल गलने वाली नहीं है। नगर पालिका परिषद कटघोरा के भीतर इस समय काटो तो खून नहीं जैसी स्थिति बनी हुई है। निविदा प्रक्रिया के नाम पर मलाई चाटने वाले ठेकेदार और अधिकारी अब अपनी खाल बचाने के लिए जुगाड़ लगाने में जुट गए हैं। लेकिन बिलासपुर कार्यालय के इस तीखे तेवर से साफ है कि इस बार टेंडर के तालाब में डुबकी लगाने वाले मगरमच्छों का बचना नामुमकिन है।
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कोरबा कटघोरा
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