Monday 14th of September 2026

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पालिका अध्यक्ष के बचाव में उतरी कांग्रेस की प्रेस वार्ता से पत्रकारों ने बनाई दूरी, जनता बोली—'सच दबाने का नाकाम प्रयास'

उपाध्यक्ष ने खोला राज! अध्यक्ष और पूरी व्यवस्था की धज्जियां उड़ीं, पालिका के बंद कमरों का सच बाहर!

गरीबों का सहारा 'अंबेडकर भवन' और 'गोल गुंबद' निजी हाथों में सौंपने की तैयारी! जनता पर पड़ेगा मोटी रकम का बोझ?

जल्द होगा बड़ा खुलासा, सामने आएंगे कई चौंकाने वाले सवाल

व्यवस्था के चक्र के आगे सिसकती जनभावनाएं और नए कप्तान की प्रशासनिक दूरदर्शिता

सुचना

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भ्रष्टाचार की खबरों से बौखलाहट: : पालिका अध्यक्ष के बचाव में उतरी कांग्रेस की प्रेस वार्ता से पत्रकारों ने बनाई दूरी, जनता बोली—'सच दबाने का नाकाम प्रयास'

Shubh Arvind Sharma

Mon, Sep 14, 2026

भ्रष्टाचार की खबरों से बौखलाहट: पालिका अध्यक्ष के बचाव में उतरी कांग्रेस की प्रेस वार्ता से पत्रकारों ने बनाई दूरी, जनता बोली—'सच दबाने का नाकाम प्रयास'

* डेढ़ महीने से चल रही भ्रष्टाचार की खबरों पर चुप्पी साधने के बाद, नगर पालिका अध्यक्ष और कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया पर 'वसूली' का मनगढ़ंत आरोप लगाया।

* कांग्रेस की इस प्रेस वार्ता से स्थानीय पत्रकारों ने बनाई दूरी, गिने-चुने लोग ही हुए शामिल; जनता ने इसे भ्रष्टाचार दबाने का राजनैतिक नाटक बताया।

* यह मामला किसी राजनैतिक दल का नहीं बल्कि सीधे तौर पर जनता के पैसों की हेराफेरी का था, ऐसे में नगर पालिका के बचाव में कांग्रेस पार्टी के उतरने पर खड़े हुए गंभीर सवाल।

* खुद कांग्रेस नेताओं द्वारा अतीत में किए गए उग्र भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों और पूर्व में गरमाए 'अटल परिसर' मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए जांच पत्र ने खोली पोल।

* सूत्रों का बड़ा खुलासा: बौखलाए तथाकथित तत्व पत्रकारों को फर्जी मामलों (जैसे एट्रोसिटी) या हमले की साजिश में फंसाने की फिराक में; सतर्क पत्रकारों ने पुलिस अधीक्षक (SP) को सौंपी सूचना।

स्थानीय ब्यूरो:नगर पालिका में फैले कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मामला अब पूरी तरह राजनैतिक दांव-पेंच और चौथे स्तंभ को दबाने की कोशिशों में उलझ चुका है। स्थानीय मीडिया द्वारा पिछले डेढ़ महीने से जनहित के मुद्दों और पालिका प्रशासन की वित्तीय गड़बड़ियों को लगातार उजागर किया जा रहा था। इन तथ्यों और प्रमाणों के आगे बेबस नजर आ रहे नगर पालिका अध्यक्ष के बचाव में अब पूरी कांग्रेस कमेटी ढाल बनकर उतर आई है। मामले को नया मोड़ देते हुए कांग्रेस ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और चल रही खबरों को सिरे से खारिज करते हुए, सीधे तौर पर इसे मीडिया द्वारा की जा रही 'वसूली' का प्रयास करार दे दिया।

स्थानीय पत्रकारों ने बनाई दूरी, जनता ने माना- भ्रष्टाचार दबाने की कोशिश

इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प और महत्वपूर्ण बात यह रही कि कांग्रेस द्वारा बुलाई गई इस प्रेस वार्ता में स्थानीय पत्रकारों ने कोई खास रुचि नहीं दिखाई। शहर के अधिकांश मुख्य और निष्पक्ष पत्रकारों ने इस पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस से दूरी बनाए रखी और इसमें बस कुछ गिने-चुने चेहरे ही शामिल हुए। पत्रकारों का यह रुख साफ दर्शाता है कि मीडिया जगत ने इन बेबुनियाद आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है। वहीं दूसरी ओर, शहर की प्रबुद्ध जनता भी इसे प्रेस कॉन्फ्रेंस के बजाय पालिका प्रशासन के भ्रष्टाचार के मुद्दों को दबाने और मीडिया की निष्पक्ष आवाज को कुचलने का एक कुत्सित प्रयास मान रही है। जनता के बीच यह चर्चा आम है कि जब प्रशासन के पास गड़बड़ियों का कोई ठोस जवाब नहीं है, तो वह ध्यान भटकाने के लिए राजनैतिक नाटक कर रहा है।

डेढ़ महीने की 'गहन चुप्पी' और अचानक वसूली का राग: क्या सच से भाग रहा प्रशासन?

जैसे ही पालिका अध्यक्ष और कांग्रेस ने अपनी कमियां छुपाने के लिए मीडिया पर वसूली का ठीकरा फोड़ा, प्रबुद्ध नागरिकों और स्थानीय गलियारों में उनकी प्रशासनिक गरिमा पर तीखे सवाल तैरने लगे हैं। सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह उठ रहा है कि यदि यह वाकई वसूली का मामला था, तो अध्यक्ष पिछले एक-डेढ़ महीने से शांत क्यों बैठे थे? वह किस चीज का इंतजार कर रहे थे और उन्होंने समय रहते कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की?

तथ्य यह है कि इतने लंबे समय तक भ्रष्टाचार व अनियमितता के गंभीर मामलों पर गहन चुप्पी साधे रखना, मुंह से एक शब्द न निकालना, और खबरों के लगातार प्रसारण से घबराकर अचानक मीडिया की आवाज को दबाने के लिए 'वसूली' का पैंतरा चलना, पालिका प्रशासन की बौखलाहट और अक्षमता को साफ तौर पर प्रदर्शित करता है।

जब अपनों ने ही चीख-चीखकर उठाया था भ्रष्टाचार का मुद्दा, तब कहां थी कांग्रेस?

इस पूरे विवाद में कांग्रेस का दोहरा चरित्र भी उजागर हो गया है। अतीत में खुद कांग्रेस पार्टी के ही वरिष्ठ नेताओं ने इसी नगर पालिका के भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर सड़कों पर उतरकर धरना-आंदोलन किया था। कांग्रेस नेताओं ने खुद चीख-चीखकर भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था, जो आज भी शहर के इतिहास में दर्ज है।

जनता अब पूछ रही है कि उस वक्त कांग्रेस कहां सोई हुई थी? उस दौरान अपने ही नेताओं के आरोपों पर कांग्रेस ने भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं करवाई? हकीकत तो यह है कि राजनैतिक नफे-नुकसान को देखते हुए कांग्रेस ने ही उस समय आंदोलनकारी विकास के धरने को पूरी तरह से निस्तेनाबूत (खत्म) कर दिया था, जिसके चलते विकास को पीछे हटना पड़ा था।

अटल परिसर मामला: भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी पूर्व में खोला था मोर्चा

नगर पालिका का यह भ्रष्टाचार कोई नया नहीं है। इससे पहले जब अटल परिसर वाला मामला पूरी तरह गरमाया हुआ था, तब विपक्षी दल भाजपा के जिलाध्यक्ष ने भी इस पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया था। उन्होंने उस वक्त जिला कलेक्टर को एक मांग पत्र सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की थी। भाजपा का यह पुराना कदम साफ करता है कि नगर पालिका के कार्यकालों में गड़बड़ियां हमेशा से जांच के दायरे में रही हैं। यह प्रशासनिक शिकायत अभी भी प्रक्रिया में है और कयासों का बाजार गर्म है कि जांच पूरी होते ही सारा सच जगजाहिर हो जाएगा तथा दोषियों पर कार्रवाई निश्चित होगी।

सनसनीखेज खुलासा: पत्रकारों पर हमले और फर्जी मामलों में फंसाने की साजिश की आशंका

इस पूरे मामले में अब एक बेहद गंभीर और डराने वाला मोड़ सामने आया है। सूत्रों से छनकर आ रही विश्वसनीय जानकारियों के अनुसार, नगर पालिका के भ्रष्टाचार की परतें लगातार खुलने से कुछ तथाकथित कतिपय लोगों और सफेदपोशों को गहरी अंदरूनी ठेस पहुंची है। अपनी साख पूरी तरह मिटती देख, ये तत्व अब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज को हमेशा के लिए दबाने की खतरनाक साजिश रच रहे हैं।

कयास लगाए जा रहे हैं कि बौखलाहट में डूबे ये लोग पत्रकारों पर रास्ते में रोककर जानलेवा हमला करवाने, डराने-धमकाने या फिर समाज में विद्वेष फैलाने वाले एट्रोसिटी (Atrocity Act) जैसे गंभीर व फर्जी मामलों में फंसाने की फिराक में हैं, ताकि पत्रकार अपनी जान और मान-सम्मान बचाने में उलझ जाएं और भ्रष्टाचार की खबरें रुक सकें।

पत्रकारों की सजगता: पुलिस अधीक्षक (SP) और स्थानीय थाने को दी गई पूर्व सूचना

हालांकि, निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता की राह पर चल रहे मीडियाकर्मियों को अपने मजबूत तंत्र और सूत्रों से इस गहरी साजिश की भनक पहले ही लग चुकी थी। किसी भी अप्रिय घटना या फर्जीवेड़े का शिकार होने से पहले ही, सजग पत्रकारों ने एकजुटता दिखाते हुए इस पूरे मामले की लिखित और विस्तृत सूचना जिला पुलिस अधीक्षक (SP) तथा स्थानीय थाना प्रभारी को प्रेषित कर दी थी। पत्रकारों ने प्रशासन को सौंपे पत्र में साफ कर दिया है कि यदि भविष्य में किसी भी पत्रकार के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, झूठा मुकदमा दर्ज कराया जाता है, या उन पर हमला होता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर वे तथाकथित तत्व और पालिका प्रशासन जिम्मेदार होगा जो खबरों से बौखलाया हुआ है।

मुद्दे को भटकाने और सच को कुचलने की नाकाम कोशिश

यह पूरा मुद्दा किसी राजनैतिक दल का था ही नहीं, यह तो सीधे तौर पर नगर पालिका प्रशासन के भीतर हो रहे भ्रष्टाचार और जनता के हक का था। ऐसे में नगर पालिका के बचाव में कांग्रेस पार्टी को बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या कांग्रेस नगर के हित के मुद्दों पर मुखर होने के बजाय भ्रष्टाचार को दबाने का कार्य कर रही है?

जब चौतरफा दबाव बढ़ा और मीडिया के तीखे सवालों का कोई प्रशासनिक या तार्किक जवाब नहीं सूझा, तो पहले 'वसूली' का झूठा राग अलापा गया और अब परदे के पीछे से पत्रकारों को डराने और फर्जी मामलों की साजिश रची जा रही है। लेकिन प्रशासन को दी गई पूर्व सूचना ने इस पूरी साजिश को समय रहते बेनकाब कर दिया है, जिससे साफ है कि पालिका के दामन पर लगे भ्रष्टाचार के दाग अब छुपने वाले नहीं हैं।

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कोरबा कटघोरा

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