कटघोरा पालिका की नई 'डील': : गरीबों का सहारा 'अंबेडकर भवन' और 'गोल गुंबद' निजी हाथों में सौंपने की तैयारी! जनता पर पड़ेगा मोटी रकम का बोझ?
Shubh Arvind Sharma
Sat, Sep 12, 2026कटघोरा पालिका की नई 'डील': गरीबों का सहारा 'अंबेडकर भवन' और 'गोल गुंबद' निजी हाथों में सौंपने की तैयारी! जनता पर पड़ेगा मोटी रकम का बोझ?

कटघोरा। कटघोरा नगर पालिका परिषद इन दिनों जनहित के फैसलों के बजाय अपने कथित अजीबोगरीब फैसलों और कारनामों को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है। बंद कमरों में कथित जासूसी कैमरों के खेल की गूंज के बीच अब पालिका प्रशासन से एक और ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आ रहा है, जिसने आम जनता के हितों पर सीधा कुठाराघात किया है। विश्वस्त सूत्रों से छनकर आ रही बड़ी खबरों के मुताबिक, नगर पालिका प्रशासन शहर के ऐतिहासिक 'गोल गुंबद' और गरीब जनता के सामाजिक कार्यक्रमों की जीवनरेखा माने जाने वाले 'अंबेडकर भवन' को निजी हाथों (प्राइवेट ऑपरेटर) में सौंपने की अंदरूनी खिचड़ी पका रहा है। यदि सूत्रों का यह दावा हकीकत में बदलता है, तो यह कटघोरा के आम नागरिकों और खास तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के साथ एक बड़ा विश्वासघात होगा।

निजी जागीर का एक और नमूना: गरीबों की अमानत पर 'निजीकरण' का हथौड़ा!
कटघोरा का अंबेडकर भवन और गोल गुंबद हमेशा से एक सार्वजनिक और लोकतांत्रिक संपत्ति रहे हैं। शहर के गरीब, मजदूर और मध्यम वर्गीय परिवार शादी-ब्याह, सामाजिक बैठकें, सांस्कृतिक कार्यक्रम या किसी भी अन्य प्रयोजन के लिए इस भवन का उपयोग बेहद मामूली शुल्क या कई बार पूरी तरह मुफ्त में करते आए हैं। लेकिन अब चर्चा है कि पालिका के 'नीति-नियंता' अपनी कथित मनमर्जी और प्रशासनिक हठधर्मिता के चलते इसे प्राइवेट ठेकेदारों को लीज पर देने का मन बना रहे हैं। राजनैतिक गलियारों में सवाल उठने लगा है कि क्या कटघोरा नगर पालिका वाकई में किसी की निजी जागीर बन गई है? जो सरकारी संपत्तियां जनता के टैक्स के पैसों से उनके कल्याण के लिए बनाई गई थीं, उन्हें किसी निजी ऑपरेटर की तिजोरी भरने के लिए क्यों इस्तेमाल किया जा रहा है?

जाग उठो कटघोरा! विकास नहीं, यह तो विनाश की गाथा लिखी जा रही है!
इस गंभीर मोड़ पर कटघोरा की जनता अब यह अच्छी तरह समझ ले कि पालिका में विकास की नहीं, बल्कि विनाश की गाथा लिखी जा रही है। जो व्यवस्था जनता के सुख-दुख में सहभागी बनने के लिए चुनी गई थी, वही आज आम आदमी के हकों का गला घोंटने पर उतारू है। अंबेडकर भवन और गोल गुंबद पूरी तरह से कटघोरा की आम जनता के लिए हैं, किसी की निजी जागीर चमकाने के लिए नहीं। अगर ये धरोहरें और सार्वजनिक स्थल आज निजी हाथों में चले गए, तो कल आम नागरिकों और गरीबों को अपने ही शहर में पाई-पाई के लिए तरसना पड़ेगा और हर छोटे-बड़े आयोजन के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
जनता को अपने हितों पर हो रहे ऐसे आत्मघाती कुठाराघात के खिलाफ अब खुलकर सामने आना होगा। यदि आज शहर के जागरूक नागरिक, युवा और प्रबुद्ध वर्ग खामोश रहे और इस तानाशाही का विरोध नहीं किया, तो याद रखिए कि पालिका की यह बेलगाम मनमर्जी और प्रशासनिक हठधर्मिता एक दिन पूरे नगर को बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर देगी।

'अंधेर नगरी चौपट राजा': मुफ्त की जगह अब चुकानी पड़ेगी मोटी कीमत!
जैसे ही ये संपत्तियां निजी हाथों में जाएंगी, सबसे बड़ा झटका कटघोरा की उस गरीब जनता को लगेगा जो महंगे प्राइवेट मैरिज हॉल्स या होटल्स का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है।
* जेब पर डाका: निजी ऑपरेटर इन भवनों को अपने व्यापारिक मुनाफे के लिए चलाएगा, जिसका सीधा मतलब है कि बुकिंग के दाम आसमान छूने लगेंगे। जो भवन कल तक आम आदमी को आसानी से मिल जाता था, उसके लिए अब मोटी रकम चुकानी पड़ेगी।
* इतिहास में ऐसा कभी नहीं देखा गया: कटघोरा के इतिहास में यह पहली बार देखा जा रहा है कि जनहित के नाम पर चुनी गई परिषद कथित तौर पर जनता की ही बुनियादी सुविधाओं को व्यावसायिक हितों के लिए कुर्बान करने पर उतारू है।
नियमों की धज्जियां उड़ाने की कथित तैयारी
शासकीय नियमों के मुताबिक, किसी भी सार्वजनिक भवन या धरोहर को निजी हाथों में सौंपने से पहले परिषद की सामान्य सभा में इस पर खुली चर्चा, निविदा (Tender) प्रक्रिया और राज्य शासन की अनुमति जैसे कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले को बहुत ही गुप्त तरीके से अंजाम देने की कोशिश की जा रही है, ताकि जनता या विपक्ष को भनक लगने से पहले ही 'फाइल' को आगे बढ़ा दिया जाए। इस कथित कारनामे के बाद शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश पनप रहा है।

दूध का दूध और पानी का पानी होना बाकी
इस गंभीर और जनहित से जुड़े मामले के उजागर होने के बाद अब जनता का धैर्य जवाब दे रहा है। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा इस कथित निजीकरण के प्रयास के खिलाफ उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग पुरजोर तरीके से उठाई जा रही है। मांग है कि शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले का कड़ा संज्ञान लें, ताकि इस कथित अंदरूनी खेल की उचित जांच कर जनविरोधी फैसलों पर तुरंत रोक लगाई जा सके और दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक व कानूनी कार्यवाही हो।
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(नोट: यह समाचार रिपोर्ट पूरी तरह से आंतरिक एवं विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और स्थानीय कयासों पर आधारित है, जिसकी प्रशासनिक व आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।)
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कोरबा कटघोरा
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