Friday 11th of September 2026

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व्यवस्था के चक्र के आगे सिसकती जनभावनाएं और नए कप्तान की प्रशासनिक दूरदर्शिता

ढाई साल टिकने वाले तिवारी के बाद पटेल एक महीना 17 दिन और साहू एक महीना भी नहीं काट पाए, जनता हैरान

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कटघोरा थाने में अचानक क्या बदला? : ढाई साल टिकने वाले तिवारी के बाद पटेल एक महीना 17 दिन और साहू एक महीना भी नहीं काट पाए, जनता हैरान

Shubh Arvind Sharma

Thu, Sep 10, 2026

कटघोरा थाने में अचानक क्या बदला? ढाई साल टिकने वाले तिवारी के बाद पटेल एक महीना 17 दिन और साहू एक महीना भी नहीं काट पाए, जनता हैरान

कटघोरा/कोरबा (छत्तीसगढ़):उपनगरीय क्षेत्र कटघोरा का पुलिस थाना इन दिनों प्रभारियों के कार्यकाल को लेकर क्षेत्र में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धार्थ तिवारी द्वारा 10 सितंबर 2026 को जारी ताजा प्रशासनिक आदेश के बाद कटघोरा थाने की कमान एक बार फिर बदल गई है। इस बार उपनिरीक्षक प्रेमचंद साहू को कटघोरा से हटाकर कोरबा कोतवाली की बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन इस ट्रांसफर ने कटघोरा पुलिसिंग की उस अस्थिरता को उजागर कर दिया है, जिससे स्थानीय जनता पूरी तरह हैरत में है।

ढाई साल बनाम चंद दिन: कटघोरा में कार्यकाल का विरोधाभास

अगर पिछले कुछ समय के इतिहास को देखें, तो कटघोरा थाने में प्रभारियों के टिकने का समीकरण पूरी तरह बदल चुका है:

* ढाई साल तक जमे रहे धर्मनारायण तिवारी: पूर्व थाना प्रभारी धर्मनारायण तिवारी ने कटघोरा में लगभग ढाई साल का एक लंबा और स्थिर कार्यकाल पूरा किया था। उनके समय में पुलिसिंग की एक निश्चित कार्यशैली सेट हो चुकी थी।

* तिवारी के जाते ही बिगड़ा गणित, एक महीना 17 दिन में हटे पटेल: धर्मनारायण तिवारी के हटने के बाद कमान संभालने वाले एम.बी. पटेल कटघोरा थाने की कुर्सी पर महज एक महीना 17 दिन ही टिक पाए और उनका पत्ता साफ हो गया।

* प्रेमचंद साहू भी नहीं कर पाए महीना पूरा: पटेल के बाद बड़ी उम्मीदों के साथ उपनिरीक्षक प्रेमचंद साहू को कटघोरा की कमान सौंपी गई थी। जनता को लगा था कि अब व्यवस्था स्थिर होगी, लेकिन साहू भी अपना एक महीना पूरा नहीं कर पाए और उनका ट्रांसफर कोरबा कोतवाली कर दिया गया।

एसपी सिद्धार्थ तिवारी की 'नो टॉलरेंस' पॉलिसी और प्रशासनिक कसावट

जनता के बीच इस बात को लेकर कौतूहल और हैरत जरूर है कि अधिकारी इतनी जल्दी क्यों बदल रहे हैं, लेकिन पुलिस गलियारों में इसे एसपी सिद्धार्थ तिवारी की कड़े निर्देशों और कर्तव्यनिष्ठ कार्यशैली से जोड़कर देखा जा रहा है। एसपी सिद्धार्थ तिवारी ज़िले में अपनी कड़क छवि और अनुशासनहीनता या लापरवाही पर तुरंत एक्शन लेने के लिए जाने जाते हैं।

विभाग के सूत्रों के मुताबिक, एसपी की डिक्शनरी में ढीली पुलिसिंग के लिए कोई जगह नहीं है। उनके द्वारा लिया गया यह फैसला पूरी तरह से जनहित को सर्वोपरि रखने और विभाग में कसावट लाने के उद्देश्य से है। इस फेरबदल से पुलिस कप्तान ने पूरे महकमे को साफ संदेश दे दिया है कि कुर्सी पर टिके रहने के लिए केवल बेहतरीन परफॉर्मेंस और कड़ा अनुशासन ही एकमात्र पैमाना होगा।

नवीन स्थानांतरण एवं पदस्थापना सूची

पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, जिला इकाई कोरबा में कुल 6 अधिकारियों और कर्मचारियों के दायित्वों में फेरबदल किया गया है, जिसकी विस्तृत सूची निम्नानुसार है:

| क्र. | पदनाम व नाम (अधिकारी/कर्मचारी) | वर्तमान पदस्थापना | नवीन पदस्थापना |

| 01 | निरीक्षक विरासत कुजुर | रक्षित केन्द्र कोरबा | प्रभारी पुसके सीएसईबी |

| 02 | निरीक्षक प्रमोद डनसेना | थाना प्रभारी कोतवाली | प्रभारी समंस वारंट सेल (पु.अ. कार्यालय कोरबा) |

| 03 | उपनिरीक्षक प्रेमचंद साहू | थाना प्रभारी कटघोरा | थाना प्रभारी कोतवाली |

| 04 | उपनिरीक्षक राजेश तिवारी | प्रभारी पुसके सीएसईबी | थाना प्रभारी कटघोरा |

| 05 | आरक्षक 483 जितेन्द्र सोनी | थाना करतला | थाना श्यांग |

| 06 | आरक्षक 555 नरोत्तम कुमार रात्रे | थाना श्यांग | थाना करतला |

फिर उपनिरीक्षक के कंधों पर बड़ी चुनौती

लगातार लग रहे इन झटकों के बीच, अब कटघोरा थाने का जिम्मा एक बार फिर उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी के कंधों पर आया है। सीएसईबी सहायता केंद्र के प्रभारी उपनिरीक्षक राजेश तिवारी को कटघोरा का नया थाना प्रभारी नियुक्त किया गया है। एक तरफ जहां ढाई साल तक एक ही प्रभारी ने थाना चलाया, वहीं अब पिछले दो महीनों के भीतर तीसरे प्रभारी के रूप में राजेश तिवारी की एंट्री हुई है।

जो थाना कभी ढाई साल तक एक ही अधिकारी के नेतृत्व में स्थिर था, वहां अचानक ऐसा क्या हुआ कि प्रभारियों के लिए 20 से 30 दिन काटना भी मुश्किल हो रहा है? क्या यह पुलिस विभाग का कोई अंदरूनी समीकरण है या कोई प्रशासनिक मजबूरी—यह सवाल इस वक्त पूरे कटघोरा क्षेत्र की जुबान पर है। अब देखना होगा कि नए प्रभारी राजेश कप्तान की सख्त उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं और इस 'अस्थिरता के दौर' को खत्म कर कितना लंबा समय कटघोरा में गुजार पाते हैं।

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कोरबा कटघोरा

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