Thursday 5th of November 2026

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कटघोरा CHC के आर्थो सर्जन डॉ. हिमांशु खुटिया ने 4 वर्षों में रचा 3,000 से अधिक सफल सर्जरीज का ऐतिहासिक कीर्तिमान

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संसाधन जन्य चुनौतियों पर सेवाभाव की विजय: : कटघोरा CHC के आर्थो सर्जन डॉ. हिमांशु खुटिया ने 4 वर्षों में रचा 3,000 से अधिक सफल सर्जरीज का ऐतिहासिक कीर्तिमान

Shubh Arvind Sharma

Thu, Nov 5, 2026

संसाधन जन्य चुनौतियों पर सेवाभाव की विजय: कटघोरा CHC के आर्थो सर्जन डॉ. हिमांशु खुटिया ने 4 वर्षों में रचा 3,000 से अधिक सफल सर्जरीज का ऐतिहासिक कीर्तिमान

कटघोरा/कोरबा:औद्योगिक जिला कोरबा इन दिनों शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं में एक अभूतपूर्व एवं अनुकरणीय कीर्तिमान को लेकर पूरे प्रदेश में वैचारिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कटघोरा में पदस्थ मूर्धन्य आर्थोपेडिक विशेषज्ञ (अस्थि रोग सर्जन) डॉ. हिमांशु खुटिया (खूंटिया) ने चिकित्सा जगत् में सेवा और संकल्प की एक नई परिभाषा गढ़ी है। बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमाओं और सीमित संसाधनों की विसंगतियों के मध्य, डॉ. खुटिया ने विगत 4 वर्षों की अल्पावधि में 3,000 से अधिक सफल आर्थोपेडिक ऑपरेशनों को निष्पादित कर शासकीय चिकित्सा तंत्र की विश्वसनीयता को पुनर्स्थापित किया है।

कॉरपोरेट चकाचौंध पर भारी डॉ. खुटिया का आत्मीय कौशल और सहज व्यवहार

कटघोरा और आसपास के क्षेत्रों में आज गोपाल हॉस्पिटल, हरिकृष्णा हॉस्पिटल, जीवांश हॉस्पिटल, एन.के.एच. (NKH) हॉस्पिटल और एम.जे. (MJ) हॉस्पिटल जैसे विशाल मल्टीस्पेशलिटी चिकित्सालय क्रियाशील हैं, जहाँ आधुनिकतम तकनीक और उच्च योग्यताधारी एम.डी. व शल्य-चिकित्सकों (सर्जन) की एक बड़ी श्रृंखला उपलब्ध है। इसके बावजूद, एक सरकारी अस्पताल की देहरी पर मरीजों का अटूट विश्वास और जनसैलाब उमड़ना डॉ. हिमांशु खुटिया के प्रति समाज के अगाध आदर को प्रमाणित करता है।

उनकी इस अनुपम लोकप्रियता का मूल आधार केवल उनका असाधारण चिकित्सकीय कौशल नहीं, बल्कि मरीजों के प्रति उनका अत्यंत संवेदनशील, आत्मीय और सहृदय व्यवहार है। जब एक पीड़ित व्यक्ति शारीरिक और मानसिक वेदना के साथ उनके पास पहुँचता है, तो डॉ. खुटिया की सहज मुस्कान, संबल देती वाणी और अपनत्व भरा दृष्टिकोण मरीज के आधे कष्ट को स्वतः ही हर लेता है। अभिजात्य वर्ग के कॉर्पोरेट परिवेश से परे, एक शासकीय चिकित्सक में दक्षता और मानवीय मूल्यों का ऐसा दुर्लभ समन्वय यह अहसास कराता है कि समाज को ऐसे डॉक्टर बड़े सौभाग्य और पुण्य प्रताप से प्राप्त होते हैं।

कॉरपोरेट प्रलोभनों का तिरस्कार, लोक-कल्याण को दी प्राथमिकता

डॉ. हिमांशु खुटिया के इस सेवा अनुष्ठान की गहराई का मूल्यांकन इस तथ्य से किया जा सकता है कि उनके उत्कृष्ट शल्य-कौशल को देखते हुए सूबे के कई ख्यातिलब्ध कॉरपोरेट अस्पतालों ने उन्हें सह-साझेदारी (पार्टनरशिप) तथा भारी-भरकम वित्तीय पैकेजों के आमंत्रण दिए थे। किंतु, व्यावसायिक चकाचौंध और ऐश्वर्यपूर्ण जीवन के इन प्रलोभनों को सिरे से खारिज करते हुए, उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े वंचित वर्ग की सेवा को सर्वोपरि माना। उनका यह निर्णय स्पष्ट करता है कि उनके लिए चिकित्सा एक जीविका मात्र नहीं, अपितु लोक-कल्याण का एक पावन अनुष्ठान है।

संवेदनशीलता की पराकाष्ठा: व्यक्तिगत कोष से निर्धनों का संबल

जहाँ समकालीन दौर में चिकित्सा व्यवस्था का बाजारीकरण विमर्श का विषय है, वहीं डॉ. खुटिया एक विरल अपवाद बनकर उभरे हैं। कटघोरा के वनांचल व ग्रामीण अंचलों से आने वाले अत्यंत निर्धन और असहाय मरीज, जो जीवनरक्षक औषधियों अथवा महंगे मेडिकल इंप्लांट्स का व्यय वहन करने में अक्षम होते हैं, उनके लिए डॉ. खुटिया स्वयं संबल बनते हैं। ऐसे अनगिनत प्रसंग आए हैं जब उन्होंने अपने व्यक्तिगत वेतन (सैलरी) से इन लाचार मरीजों की चिकित्सा और इंप्लांट्स का खर्च वहन कर उनका सफल ऑपरेशन सुनिश्चित किया है।

दिव्यांगता के अंधकार से ससम्मान जीवन की ओर: एक प्रामाणिक दृष्टांत

क्षेत्र में उनकी नैदानिक तत्परता का जीवंत उदाहरण 'राजकुमार' (निवासी महेशपुर, कटघोरा) का मामला है, जो एक भीषण सड़क दुर्घटना में अपने पैर गंवाने की कगार पर थे। निजी अस्पतालों द्वारा भारी-भरकम एस्टीमेट और संभावित दिव्यांगता की आशंका जताए जाने के बाद विवश परिजनों ने तत्कालीन जिला प्रशासन (कलेक्टर) से गुहार लगाई थी। यह मामला जैसे ही डॉ. खुटिया के संज्ञान में आया, उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत त्वरित और अत्यंत जटिल शल्य-क्रिया (सर्जरी) कर उस युवक को चिरस्थायी दिव्यांगता के अभिशाप से मुक्त कर दिया।

सुलभ हुई सुदूर अंचलों की स्वास्थ्य सुरक्षा

हिप रिप्लेसमेंट (कूल्हा प्रत्यारोपण) और जटिल फ्रैक्चर फिक्सेशन जैसे ऑपरेशनों के लिए जहाँ कभी ग्रामीण परिवारों की जीवनभर की संचित पूंजी दांव पर लग जाती थी, वे आज कटघोरा के इस शासकीय चिकित्सालय में पूर्णतः निःशुल्क और सुगमता से संपन्न हो रहे हैं। डॉ. खुटिया शासकीय दायित्वों के निर्वहन के उपरांत कोरबा के जमनीपाली स्थित रामन्ना आर्थो केयर एंड ट्रॉमा सेंटर के माध्यम से भी समाज को अपनी अनवरत विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

कृतज्ञ समाज द्वारा अभिनंदित

हाल ही में आयोजित एक गरिमामयी नागरिक अभिनंदन समारोह में डॉ. हिमांशु खुटिया को उनकी इस अद्वितीय कर्तव्यनिष्ठा के लिए विशेष प्रशंसा पत्र से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर प्रबुद्ध वक्ताओं ने रेखांकित किया कि, "डॉ. खुटिया केवल क्षतिग्रस्त अस्थियों और जोड़ों का संधान नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे अभावों के कारण टूट चुके निर्धन परिवारों के खोए हुए सामाजिक-आर्थिक विश्वास को भी जोड़ रहे हैं।"

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, नीति-निर्धारकों और बुद्धिजीवियों ने एक सुर में डॉ. हिमांशु खुटिया को समकालीन शासकीय चिकित्सा व्यवस्था का एक सच्चा 'रोल मॉडल' स्वीकार किया है।

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कोरबा कटघोरा

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