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दिल्ली से निराश होकर कटघोरा अस्पताल पहुँचा मरीज.! : डॉ. हिमांशु खुटिया ने प्रदान किया नया जीवन...

Shubh Arvind Sharma

Sun, Jan 25, 2026

दिल्ली से निराश होकर कटघोरा अस्पताल पहुँचा मरीज.! डॉ. हिमांशु खुटिया ने प्रदान किया नया जीवन...

5 साल से डार्क मोड़ में था मरीज.! 6-7 घण्टे की जटिल सर्जरी से सूरज को मिला नया जीवन

कोरबा/कटघोरा:-"डॉक्टर को भगवान का दर्जा यू ही नही दिया गया है,वे अथक परिश्रम कर मरीज को नया जीवन प्रदान करते हैं।इसका जीता जागता उदाहरण इन दिनों कटघोरा के सरकारी अस्पताल में देखने को मिल रहा है जहां आर्थो सर्जन डॉ. हिमांशु खुटिया अपनी सेवाएं दे रहे हैं।हाल ही में डॉ खुटिया के पास एक ऐसा मरीज पहुचा जो 5 साल से डार्क मोड़ था।जिसको बड़ी सर्जरी की आवश्यकता थी।डॉ खुटिया ने मरीज को बेहतर चिकित्सा प्रदान कर उसे स्वस्थ कर दिया।डॉ खुटिया की कड़ी मेहनत और लगन से मरीजो को बेहतर चिकित्सा मिल रही है।जटिल से जटिल सर्जरी कर मरीजो को नया जीवन प्रदान कर रहे हैं।आपको बता दे कि डॉक्टर हिमांशु खुटिया को वर्ल्ड लेवल का डॉक्टर भी कहा जाता है।

अभी हाल में ही डॉ. खुटिया ने एक ऐसे मरीज की सफल सर्जरी की है जो पांच साल से डार्क मोड़ में था, जिसके दोनों पैर एक सड़क हादसे में गम्भीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे।मरीज के ऊपर अपने परिवार के पालन पोषण की बड़ी जिम्मेदारी थी।मरीज की हालत ऐसी हो चुकी थी कि वह स्वस्थ होने की पूरी उम्मीद खो चुका था।इलाज के अभाव में मरीज पांच साल तक पीड़ा झेलता रहा।उसने ठीक होने की सारी उम्मीदे खो दी थी,वह अपनी व्यथा पर आंसू बहाने को मजबूर था।मरीज ने पांच साल पहले अपना इलाज दिल्ली के किसी बड़े अस्पताल में कराया था,लेकिन स्वस्थ होने बजाय उसकी हालत बिगड़ती चली गई"पर कहते हैं ना,भगवान के घर देर है, अंधेर नही" जी हाँ, किसी सज्जन ने मरीज को डॉ. हिमांशु से मिलने की सलाह दी और डॉ हिमांशु खुटिया ने मरीज की सफल सर्जरी कर कटघोरा अस्पताल का नाम एक बार फिर रोशन किया है।

आपको बता दे कि बांकी मोगरा का रहने वाला सूरज कुमार जो कि पेशे से इंजीनियर है और दिल्ली में एक कम्पनी में काम करता है वहाँ एक सड़क हादसे में सूरज का एक्सीडेंट हो गया जिसमें उसके दोनों पैर बुरी तरह से जख्मी हो गए थे।इस दौरान इन्होंने अपना ईलाज दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में कराया।जहां इनके दोनों पैरों में रॉड लगाया गया था।कुछ साल बाद इनके पैरो में लगा रॉड टूट गया और सूरज की हालत बेहद खराब हो गई,राड इस कदर टूट गया था कि राड पैर से बाहर आ गया था।इस दौरान सूरज असहनीय पीड़ा व तख़लीक़ झेलने को मजबूर था।आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह ईलाज करवा पाने में असमर्थ था।पूरे पांच साल तक सूरज ये पीड़ा झेल रहा था।इस दौरान किसी सज्जन ने सूरज को डॉ हिमांशु से मिलने की सलाह दी।

डॉ हिमांशु खुटिया के पास जब सूरज पहुचा तो उसकी हालत बेहद खराब थी।डॉ खुटिया ने सूरज को अस्पताल में एडमिट होने की सलाह दी,उसके बाद सूरज के इलाज की प्रक्रिया शुरू हुई।सूरज की सर्जरी के लिए डॉ खुटिया को कड़ी मेहनत करनी पड़ी और 6-7 घंटे के ऑपरेशन बाद सूरज की सफल सर्जरी हुई।सूरज के दोनों पैर अब ठीक है और वह अपने पैरों पर चल पाएगा।डॉ हिमांशु खुटिया ने बताया कि ऐसे सर्जरिया बड़े मल्टीस्पेशलिटी अस्पतालों में ही सम्भव हो पाती है जहां लाखो रुपये का खर्च आता है।लेकिन कटघोरा अस्पताल के बीएमओ व डॉक्टरों के अथक प्रयासों से ऐसी सर्जरिया हो पा रही है।

सर्जरी सफल होने के बाद सूरज ने भावुक शब्दो मे कहा कि डॉ हिमांशु खुटिया डॉक्टर ही नही बल्कि भगवान है जिन्होंने मेरा इलाज कर मुझे नया जीवन प्रदान किया है।सूरज ने ठीक होने की उम्मीद खो दी थी,लेकिन जहां हिमांशु खुटिया जैसे डॉक्टर्स मौजूद हैं वहां मरीजो को कभी निराश होने की आवश्यकता नही है।डॉ हिमांशु खुटिया ने एक बार फिर बड़ी सर्जरी कर कटघोरा अस्पताल का नाम पूरे जिले में रोशन किया है।

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