Tuesday 13th of October 2026

ब्रेकिंग

बगीचा नगर पंचायत में दुकान आवंटन के 'महाघोटालेबाज' तत्कालीन CMO की नई पोस्टिंग से कटघोरा में भी मंचा हड़कंप

दुकानदारों ने बयां किया दर्द; सौंदर्यीकरण की वेदी पर चढ़े दर्जनो हरे-भरे पेड़, DFO बोले– "मिली थी अनुमति"

एक्शन में आबकारी उपनिरीक्षक दीपमाला,कुटेलामुड़ा में शराब माफियाओं के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी, दो आरोपी गिरफ्तार!

अवैध शराब माफिया के आगे नतमस्तक हुआ तंत्र, चूड़ियां पहनकर घर से निकलीं गाँव की महिलाएं!

भ्रष्टाचार का साया, अपराधियों का दुस्साहस, रेत माफियाओ का तांडव... क्या कटघोरा में खत्म हो गया है कानून का इकबाल?

सुचना

Welcome to the Sharma News, for Advertisement call +91-7879549029

अटल मूर्ति घोटाला: : विकास सिंह के 'फ्लॉप शो' की अंदरूनी कहानी; राजनैतिक दबाव के आगे टेके घुटने या खुद ही नहीं उठा पाए आंदोलन का बोझ?

Shubh Arvind Sharma

Sat, Aug 1, 2026

अटल मूर्ति घोटाला: विकास सिंह के 'फ्लॉप शो' की अंदरूनी कहानी; राजनैतिक दबाव के आगे टेके घुटने या खुद ही नहीं उठा पाए आंदोलन का बोझ?

कटघोरा। कटघोरा के ऐतिहासिक अटल चौक पर तथाकथित अपमान का मुद्दा उठाकर अपनी डूबती राजनैतिक नैया को पार लगाने की कोशिश करने वाले कांग्रेसी नेता विकास सिंह का 'हाई-वोल्टेज ड्रामा' 32 घंटे में ही फुस्स हो गया। बिना किसी तार्किक परिणति के अचानक धरना समाप्त करने की इस घोषणा के बाद अब कटघोरा के राजनैतिक गलियारों में कानाफूसी और चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म है।हर जुबान पर बस एक ही सवाल है कि आखिर विकास सिंह को इतनी जल्दी अपना तंबू क्यों उखाड़ना पड़ा? क्या उन पर पर्दे के पीछे से कोई बड़ा राजनैतिक दबाव काम कर रहा था, या फिर वे खुद ही इस आंदोलन का भारी-भरकम बोझ उठाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए?

अंदरूनी कहानी: राजनैतिक दबाव या खुद का आत्मसमर्पण?

राजनैतिक विश्लेषकों और स्थानीय प्रबुद्ध जनों के बीच इस 'यू-टर्न' को लेकर दो मुख्य थ्योरी सामने आ रही हैं:

भारी राजनैतिक दबाव की थ्योरी: सूत्र बताते हैं कि जब भाजपा संगठन ने खुद आगे बढ़कर मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की पुरजोर मांग कर दी, तो कांग्रेस के हाथ से मुद्दा पूरी तरह छिन गया। इसके बाद प्रशासन के सख्त रुख और राजनैतिक रणनीतियों के चलते विकास सिंह चौतरफा घिर गए। चर्चा है कि इसी अदृश्य राजनैतिक दबाव के आगे कांग्रेसी खेमे को घुटने टेकने पड़े।

आंदोलन का बोझ उठाने में नाकामी: दूसरी और सबसे सटीक वजह यह मानी जा रही है कि विकास सिंह इस धरने की गंभीरता और उसका राजनैतिक बोझ संभाल ही नहीं पाए। 'खोदा पहाड़, निकली चुहिया' की तर्ज पर जनता ने इस आंदोलन से पूरी तरह दूरी बना ली। खाली पड़ी कुर्सियां और कार्यकर्ताओं की बेरुखी देखकर विकास सिंह भांप गए कि इस मृतप्राय आंदोलन को ज्यादा खींचने से उनकी खुद की राजनैतिक किरकिरी और थू-थू होनी तय है।

'अंधा बांटे रेवड़ी' खेल का पर्दाफाश, मगरमच्छों पर कब होगा वार?

इस बीच, मामले में केवल एक छोटे सब-इंजीनियर (उप-अभियंता) को निलंबित कर बलि का बकरा बनाए जाने से जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का साफ कहना है कि बिना मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) मुद्रिका प्रसाद तिवारी के हस्ताक्षरों और वित्तीय मंजूरी के एक रुपये का भी भुगतान होना नामुमकिन है। CMO तिवारी और ठेकेदार की इस जुगलबंदी ने मिलकर करोड़ों के वारे-न्यारे किए, लेकिन गाज सिर्फ छोटे कर्मचारी पर गिरी है।भाजपा नेताओं ने दोटूक कहा है कि जब तक इस महा-घोटाले के असली वजीर यानी CMO और भ्रष्ट ठेकेदार को सीधे जेल नहीं भेजा जाता, तब तक यह लड़ाई अधूरी है।

विकास सिंह के इस फ्लॉप शो ने यह साबित कर दिया है कि खोखले मुद्दों पर केवल सुर्खियां बटोरी जा सकती हैं, राजनैतिक मुकाम नहीं हासिल किया जा सकता। कटघोरा की जनता ने उनके इस ड्रामे को सिरे से नकार कर स्पष्ट संदेश दे दिया है।

Tags :

कोरबा कटघोरा

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें