जांच से पहले ही 'पाप' धोने की नाकाम कोशिश: : धनोद से पेंटर बुलाकर साक्ष्य मिटाने का खेल, सवालों पर दुबके कटघोरा CMO, फोन उठाना भी किया बंद
Shubh Arvind Sharma
Thu, Jul 30, 2026
जांच से पहले ही 'पाप' धोने की नाकाम कोशिश: धनोद से पेंटर बुलाकर साक्ष्य मिटाने का खेल, सवालों पर दुबके कटघोरा CMO, फोन उठाना भी किया बंद
कटघोरा। कटघोरा के बहुचर्चित अटल मामले में भ्रष्टाचार की कलई खुलने के डर से जिम्मेदार अधिकारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। मामला अभी जांच की कसौटी पर ही है और अंतिम रिपोर्ट का आना बाकी है, लेकिन इसके पहले ही 'चोरी ऊपर से सीनाजोरी' की तर्ज पर गड़बड़ियों पर पर्दा डालने का एक सनसनीखेज पैंतरा चला गया। घटिया निर्माण को छुपाने के लिए आनन-फानन में धनोद से विशेष रूप से पेंटर बुलवाया गया, ताकि साक्ष्यों की 'लीपापोती' की जा सके। हालांकि, मुस्तैदी के चलते यह दांव उलटा पड़ गया और पेंटर काम शुरू ही नहीं कर पाया। इस पूरे मामले पर जब मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो वे 'कबूतर की तरह आंखें मूंदकर' बैठ गए और उन्होंने फोन उठाना तक बंद कर दिया है।

जांच रिपोर्ट से पहले 'अंधेर नगरी चौपट राजा' का खेल
कटघोरा का अटल निर्माण मामला शुरू से ही भ्रष्टाचार की दीमक का शिकार रहा है। घटिया निर्माण और कमीशनखोरी की गूंज जब ऊंचे गलियारों तक पहुंची, तब जाकर कहीं प्रशासन की नींद खुली और जांच के आदेश दिए गए। तकनीकी टीम ने मौके का मुआयना भी किया। नियम कहते हैं कि जांच के दौरान यथास्थिति बनी रहनी चाहिए, लेकिन यहां तो 'चोर की दाढ़ी में तिनका' वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। अपनी गर्दन फंसती देख दोषियों ने जांच रिपोर्ट आने से पहले ही साक्ष्यों को दफन करने की पूरी तैयारी कर ली थी।
धनोद से बुलावा, पर दांव पड़ा उलटा
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दीवारों की गहरी दरारों, घटिया प्लास्टर और तकनीकी चूक को छुपाने के लिए बाहर (धनोद) से पेंटर को ठेके पर बुलाया गया था। रणनीति साफ थी—जांच अधिकारी दोबारा आएं या रिपोर्ट फाइनल हो, उससे पहले ही चूना-पुट्टी लगाकर सब कुछ 'चकाचक' दिखा दिया जाए। लेकिन कहते हैं न कि 'सौ दिन चोर के, तो एक दिन शाह का'। पेंटर अभी ब्रश थाम भी नहीं पाया था और काम शुरू ही नहीं हुआ था कि इस साजिश का भंडाफोड़ हो गया।

सवालों से भागे साहब: CMO ने साधी रहस्यमयी चुप्पी
इस पूरे घालमेल और नियम-विरुद्ध कदम को लेकर जब ग्राउंड जीरो से मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) को फोन लगाया गया, तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। सूत्रों का कहना है कि साहब इस समय सवालों के तीखे तीरों से बचने के लिए 'बगले झांक रहे हैं'। जब विभाग का मुखिया ही फोन से दूरी बना ले, तो साफ हो जाता है कि 'दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है'। जिम्मेदार अधिकारी का इस तरह फोन से किनारा कर लेना उनके ऊपर उठ रही उंगलियों को और मजबूत कर रहा है।
जनता ने खोला मोर्चा: 'अब बख्शे नहीं जाएंगे दोषी'
स्थानीय नागरिकों और सजग समाजसेवियों में इस प्रशासनिक नौटंकी को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह सीधे तौर पर शासकीय जांच को प्रभावित करने और सबूत मिटाने का संगीन अपराध है। गनीमत रही कि पेंटर काम शुरू नहीं कर सका, वरना भ्रष्टाचार की यह इमारत हमेशा के लिए सफेद रंग के पीछे छुप जाती। जनता अब इस पूरे मामले को लेकर आर-पार के मूड में है और मांग की जा रही है कि फोन पर चुप्पी साधने वाले CMO और इस लीपापोती के मास्टरमाइंड पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
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कोरबा कटघोरा
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