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: --तानाखार जमीन घोटाला: सरकारी ज़मीन का अवैध सौदा प्रदर्शित, कलेक्टर अजित वसंत ने लिया त्वरित संज्ञान..! मचा हड़कंप, दोषी अफसरों की उलटी गिनती शुरू...!

Shubh Arvind Sharma

Fri, Jun 6, 2025
--तानाखार जमीन घोटाला: सरकारी ज़मीन का अवैध सौदा प्रदर्शित, कलेक्टर अजित वसंत ने लिया त्वरित संज्ञान..! मचा हड़कंप, दोषी अफसरों की उलटी गिनती शुरू...! कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा – जिले के राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार का एक बड़ा और संगठित खेला सामने आया है। ग्राम तानाखार में शासकीय मद से प्राप्त कृषि पट्टा भूमि का विधि विरुद्ध क्रय-विक्रय कर उसे निजी संपत्ति की तरह बेच देने का मामला अब जिले की प्रशासनिक नींव को हिलाने लगा है। मामला इतना गंभीर है कि खुद जिले के ईमानदार और तेजतर्रार कलेक्टर अजित वसंत को इसमें त्वरित हस्तक्षेप करना पड़ा।इनके हस्तक्षेप से भ्रष्टाचारियों में हड़कंप मच गया है। शिकायत मिलते ही कलेक्टर ने लिया त्वरित एक्शन, जांच के आदेश सोमवार को जनदर्शन में प्रस्तुत हुए एक आवेदन ने पूरे मामले की पोल खोल दी। आवेदन में बताया गया कि वर्ष 1974-75 में शासकीय कृषि प्रयोजन हेतु खसरा नं. 731/9, रकबा 0.619 हेक्टेयर भूमि महेशपुर निवासी मोर्ध्वजपुरी पिता सूर्यभान पूरी को दी गई थी। लेकिन न तो मोर्ध्वजपुरी ने कभी कब्जा लिया और न ही खेती की। इसके उलट, वर्ष 2020 में उक्त जमीन को कटघोरा निवासी अशफाक अली को 10 लाख रुपये में चेक के माध्यम से बेच दिया गया – वो भी आम मुख्तियारनामा बनाकर। और यहीं से शुरू होता है एक सुनियोजित भ्रष्ट खेल। पटवारी से उपपंजीयक तक, बनी भ्रष्टाचार की चेन! इस घोटाले में शामिल होने के गंभीर आरोप तानाखार के तत्कालीन पटवारी जितेश जायसवाल, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार और कटघोरा उपपंजीयक पर लगे हैं। शासकीय भूमि को निजी संपत्ति दिखाकर उसका नक्शा, चौहद्दी, 22 कालम तैयार कराया गया और ₹92,000 का ई-स्टांप लगाकर रजिस्ट्री करवा दी गई। इस पूरे खेल में दस्तावेज़ लेखक, गवाह, बैंक और उपपंजीयक कार्यालय सभी की भूमिका संदेह के घेरे में ..? रजिस्ट्री के बाद उक्त भूमि को अशफाक अली के रिश्तेदार तौकिर अहमद ने अपने नाम करा लिया और राजस्व रिकॉर्ड (B-खसरा, 5 साला) में अवैध रूप से इंद्राज करा दिया। इसके लिए हल्का पटवारी व राजस्व निरीक्षक ने नक्शा कटवाया, और राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के किनारे कृषि भूमि के नाम पर पट्टे की भूमि को दिखाकर उसका राजस्व प्रकरण क्रमांक 202307050400020/B-121/2022-23 तैयार करवा लिया। SDM और तहसीलदार की संदिग्ध भूमिका: संरक्षण या मिलीभगत..? तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), तहसीलदार और SDM पोड़ी उपरोड़ा ने शिकायतों को दरकिनार करते हुए इस अवैध कार्रवाई पर कोई संज्ञान नहीं लिया। इतना ही नहीं, तौकिर अहमद द्वारा प्रस्तुत धारा 145 का प्रकरण (202408050300006) भी दिनांक 15/05/2025 को उनके पक्ष में पारित कर दिया गया। सरकारी जमीन की लूट: किसानों के अधिकारों पर डाका! यह ध्यान देने योग्य है कि शासकीय मद की भूमि बेची नहीं जा सकती, न ही इसका उपयोग किसी निजी व्यापारिक उद्देश्यों के लिए हो सकता है। ये पट्टे केवल कृषि उपयोग हेतु होते हैं और विशिष्ट परिस्थितियों में ही कलेक्टर के आदेश से हस्तांतरित किए जा सकते हैं। इसके बावजूद राजस्व अमले ने नियमों को ताक पर रखकर सरकारी संपत्ति का व्यावसायीकरण कर डाला। अब क्या..? दोषियों पर कब गिरेगी गाज..? जिला प्रशासन की आंखों के सामने इतने वर्षों तक चला यह घोटाला कई गंभीर सवाल खड़े करता है: क्या पटवारी से लेकर SDM तक सबकी मिलीभगत थी..? जब शासकीय पट्टे की भूमि का क्रय-विक्रय प्रतिबंधित है, तो रजिस्ट्री कैसे हो गई..? क्या राजस्व रिकॉर्ड में जानबूझकर हेराफेरी की गई..? क्या अशफाक अली, तौकिर अहमद और मोर्ध्वजपुरी के बीच हुआ ये सौदा "भ्रष्टाचार का दस्तावेज़ी प्रमाण" नहीं..? अब जब मामला सीधे कलेक्टर अजित वसंत के संज्ञान में है, जिनकी छवि एक ईमानदार, सख्तऔर न्यायप्रिय अफसर की है – तो यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस संगठित भ्रष्टाचार में शामिल राजस्व माफियाओं पर गाज गिरती है या फिर उन्हें सिस्टम की ढाल मिलती है? यह खबर सिर्फ एक ज़मीन घोटाले की नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक जिम्मेदारियों की असलियत की तस्वीर है। अगर ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो ‘शासकीय भूमि संरक्षण’ जैसे कानून कागजों तक ही सिमट जाएंगे।

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