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कटघोरा मूर्ति कांड: पुलिस ने कहा—'नहीं मिली कोई शिकायत', : अफसरों की मक्कारी बेनकाब; तकनीक की आड़ में सच छिपाने वाले 'एआई' पत्र की हो निष्पक्ष जांच!

Shubh Arvind Sharma

Tue, Aug 11, 2026

कटघोरा मूर्ति कांड: पुलिस ने कहा—'नहीं मिली कोई शिकायत', अफसरों की मक्कारी बेनकाब; तकनीक की आड़ में सच छिपाने वाले 'एआई' पत्र की हो निष्पक्ष जांच!

कटघोरा। नगर पालिका परिषद कटघोरा का अटल मूर्ति घोटाला अब 'सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज को' और प्रशासनिक नंगनाच की सारी हदें पार कर चुका है। इस पूरे मामले में अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज भंडाफोड़ हुआ है। सोशल मीडिया पर जिस तथाकथित 'एआई जनरेटेड फर्जी पत्र' को लेकर नगर पालिका प्रशासन पुलिसिया कार्रवाई का ढिंढोरा पीट रहा था, उस पर खुद कटघोरा पुलिस ने पानी फेर दिया है। पुलिस ने साफ तौर पर इनकार कर दिया है कि उनके पास इस मामले से जुड़ी कोई भी शिकायत या एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के लिए नगर पालिका का कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा है। इस खुलासे के बाद अफसरों के 'हाथ-पांव फूल गए हैं' और पूरी महकमे की कलई बीच चौराहे पर खुल गई है।

'चोर की दाढ़ी में तिनका': पुलिस के इनकार से खुली झूठ की पोल!

अब तक नगर पालिका प्रशासन जनता को यह 'खयाली पुलाव' परोस रहा था कि मामले की जांच पुलिस कर रही है। लेकिन पुलिस के इस दोटूक बयान ने साबित कर दिया है कि प्रशासन केवल 'अंधों में काना राजा' बनकर जनता की आंखों में धूल झोंक रहा था:

* शिकायत से साफ इनकार: जब खुद पुलिस ने कह दिया कि उनके पास कोई शिकायत आई ही नहीं, तो सवाल उठता है कि नगर पालिका हफ्तों से किस जांच का झूठा नाटक रच रही थी?

* लीक पत्र की निष्पक्ष जांच की मांग: पुलिस के इस खुलासे के बाद जनता का गुस्सा भड़क उठा है। नागरिकों ने अब सीधे कॉलर पकड़कर मांग की है कि जिस लीक पत्र को अफसरों ने रातों-रात 'एआई' का भूत बताकर खारिज कर दिया था, सबसे पहले उसकी ही स्टेट साइबर सेल से उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

* तकनीकी ढोंग का जनाजा: जनता का सीधा आरोप है कि विभागीय सच बाहर आ जाने के डर से अफसरों ने एआई (AI) का झुनझुना थमाया था ताकि मुख्य मूर्ति घोटाले से ध्यान भटकाया जा सके और मलाईखोरों को सुरक्षित रास्ता दिया जा सके।

जानकारों का बड़ा खुलासा: 'पुलिस जांच होती तो खुल जाते पालिका के काले कारनामे!'

इस प्रशासनिक चुप्पी और पुलिस के पास न जाने के पीछे की असली इनसाइड स्टोरी अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। मामले को करीब से देखने वाले और प्रशासनिक मामलों के जानकारों ने नाम न छापने की शर्त पर एक बड़ा खुलासा किया है। जानकारों का कहना है कि यदि नगर पालिका प्रशासन इस तथाकथित 'एआई जनरेटेड फर्जी पत्र' को लेकर सचमुच पुलिस के पास चला जाता, तो पुलिस की साइबर सेल को इसकी गहराई से जांच करनी पड़ती।

इस निष्पक्ष तकनीकी जांच में न सिर्फ उस लीक पत्र की पूरी सच्चाई सामने आ जाती, बल्कि नगर पालिका के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार के कई अन्य 'काले कारनामे' और फाइलों की हेराफेरी भी उजागर हो जाती। अफसरों को अच्छी तरह मालूम था कि 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' वाला यह पैंतरा उन पर ही भारी पड़ सकता है। पुलिस जांच की आंच सीधे उन बड़े रसूखदारों और मलाईखोर चेहरों तक पहुंच जाती जो किसी राजनीतिक दल की 'गोद में बैठकर मजे से दाढ़ी मुड़वा रहे हैं'। यही वजह है कि शिकायत करने से दूरी बनाई गई और केवल झूठ का ढोंग रचा गया।

'हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और'

14 लाख रुपये की कथित ब्रॉन्ज मूर्ति का सीमेंट-कंक्रीट पहली ही बारिश में 'ताश के पत्तों की तरह' बिखरने के बाद से ही विभाग 'काटो तो खून नहीं' वाली स्थिति में है। सब-इंजीनियर को सस्पेंड करना केवल एक 'मोहरे' की बलि चढ़ाने जैसा था ताकि बड़े मगरमच्छों को बचाया जा सके। असली खिलाड़ी तो पर्दे के पीछे बैठकर आज भी मलाई चाट रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, खुद के ही लीक पत्र को एआई (AI) का बहाना बताकर खारिज करना और फिर पुलिस कार्रवाई के नाम पर सांप निकल जाने के बाद लकीर पीटना यह साबित करता है कि 'पूरी की पूरी दाल ही काली है'।

जनता का खौलता खून: 'ईंट से ईंट बजाने की तैयारी'

कटघोरा की जागरूक जनता अब इस प्रशासनिक नौटंकी और पुलिस के खुलासे के बाद आर-पार की लड़ाई के मूड में है, क्योंकि अब 'पानी सिर से ऊपर जा चुका है।' स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन चाहे जितने भी पैंतरे बदल ले, भ्रष्टाचार की यह दुर्गंध अब छिपने वाली नहीं है। लोगों ने साफ शब्दों में अल्टीमेटम दिया है कि जब तक लीक पत्र की निष्पक्ष जांच नहीं होती और नगर पालिका के इन काले कारनामों का पूरी तरह पर्दाफाश कर दोषियों को जेल नहीं भेजा जाता, तब तक आंदोलन थमेगा नहीं। आने वाले दिनों में नगर पालिका परिषद का उग्र घेराव कर 'ईंट से ईंट बजा दी जाएगी'।

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कोरबा कटघोरा

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