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कटघोरा विधानसभा: पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कंवर का पलड़ा भारी, : भाजपा राज में भूले अटल जी के आदर्श— 'जो अपने पितृ पुरुष के नहीं हुए, वे जनता के क्या होंगे?'

Shubh Arvind Sharma

Wed, Aug 12, 2026

कटघोरा विधानसभा: पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कंवर का पलड़ा भारी, भाजपा राज में भूले अटल जी के आदर्श— 'जो अपने पितृ पुरुष के नहीं हुए, वे जनता के क्या होंगे?'

कटघोरा। कटघोरा विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। पूर्व कांग्रेस विधायक पुरुषोत्तम कंवर और वर्तमान भाजपा विधायक प्रेमचंद पटेल के कार्यकाल की तुलना में अब पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी का नाम जुड़ने से बहस बेहद आक्रामक हो चुकी है। क्षेत्र की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों का साफ मानना है कि पुरुषोत्तम कंवर का कार्यकाल विकास और जनसेवा के मामले में वर्तमान भाजपा विधायक से कहीं आगे था। वहीं, भाजपा पर अपने ही पितृ पुरुष अटल जी के अपमान का गंभीर आरोप लग रहा है।

पुरुषोत्तम कंवर: जनता के सच्चे सेवक और विकास के पर्याय

पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कंवर ने अपने कार्यकाल में कटघोरा की जनता के दिलों पर राज किया है। बोधराम कंवर जी की ईमानदार और स्वच्छ राजनीति की विरासत को आगे बढ़ाते हुए पुरुषोत्तम कंवर ने क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किए:

* अंतिम व्यक्ति तक विकास: कंवर ने ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में सड़कों, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों का जाल बिछाया, जो सीधे तौर पर जमीन से जुड़े नेता की पहचान है।

* सुख-दुख के साथी: सत्ता में रहने के बावजूद पुरुषोत्तम कंवर का दरवाजा हर गरीब और जरूरतमंद के लिए चौबीसों घंटे खुला रहता था, जो आज के भाजपा राज में दुर्लभ हो चुका है।

* स्थानीय हितों की रक्षा: कंवर ने हमेशा गेवरा-दीपका खदान प्रभावितों और स्थानीय युवाओं के रोजगार के लिए आक्रामक लड़ाई लड़ी और कॉरपोरेट के सामने कभी घुटने नहीं टेके।

भाजपा शासन में अटल जी का अपमान और वर्तमान विधायक की नाकामी

दूसरी तरफ, वर्तमान भाजपा विधायक प्रेमचंद पटेल के कार्यकाल में क्षेत्र की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। भाजपा चुनाव में तो अटल बिहारी वाजपेयी जी के नाम का सहारा लेती है, लेकिन सत्ता में आते ही उनके सिद्धांतों को पूरी तरह भुला देती है:

* सिद्धांतों का हनन: अटल जी ने जिस छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण 'सुशासन' के लिए किया था, आज उसी छत्तीसगढ़ के कटघोरा में भ्रष्टाचार, धूल-प्रदूषण और बेरोजगारी का बोलबाला है।

* अटल जी की नीतियों की अनदेखी: अटल जी हमेशा स्थानीय विस्थापितों और गरीबों के हक में खड़े होते थे, लेकिन वर्तमान भाजपा विधायक पूंजीपतियों के इशारे पर काम कर रहे हैं। क्षेत्र का युवा रोजगार के लिए भटक रहा है और विधायक मौन हैं।

'जो अपने पितृ पुरुष के नहीं हुए, वे जनता के क्या होंगे?'

कटघोरा के सियासी गलियारों में अब यह नारा गूंज रहा है कि "जो अपने पितृ पुरुष के नहीं हुए, वे जनता के क्या होंगे?"

जनता के बीच यह साफ आक्रोश है कि भाजपा केवल वोटों की फसल काटने के लिए अटल जी के नाम का ढोल पीटती है। लेकिन जब उनकी विकासवादी सोच और गरीबों के कल्याण की नीतियों को लागू करने की बारी आती है, तो भाजपा नेता उन्हें पूरी तरह दरकिनार कर देते हैं। अपने ही मार्गदर्शक और पितृ पुरुष अटल जी के आदर्शों का यह खुला अपमान कटघोरा की जनता को कतई बर्दाश्त नहीं है।

कंवर की साख के सामने पटेल फीके

तुलना साफ है—एक तरफ पुरुषोत्तम कंवर हैं जिन्होंने अपनी पारिवारिक और राजनैतिक साख को दांव पर लगाकर हमेशा कटघोरा की माटी की सेवा की। दूसरी तरफ वर्तमान विधायक प्रेमचंद पटेल हैं, जिनके पास न तो कोई स्पष्ट विज़न है और न ही जनता के प्रति कोई ठोस जवाबदेही। भाजपा की इस वादाखिलाफी और अटल जी के सिद्धांतों के अपमान ने यह साबित कर दिया है कि कटघोरा का असली विकास केवल पुरुषोत्तम कंवर के नेतृत्व में ही सुरक्षित है।

Tags :

कोरबा कटघोरा

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