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भेड़ और ऊँट जंगल का कर रहे सफाया..! : जिम्मेदार बने मूकदर्शक..? कटघोरा वनमंडल के पसान क्षेत्र का है मामला..

Shubh Arvind Sharma

Sun, Sep 14, 2025

भेड़ और ऊँट जंगल का कर रहे सफाया..! जिम्मेदार बने मूकदर्शक..? कटघोरा वनमंडल के पसान क्षेत्र का है मामला..

कटघोरा:-इन दिनों कटघोरा वनमंडल के जंगलो में भेड़ और ऊँट का बोलबाला है वही वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी तुगलकी बयान बाजी कर अपने आप को बगुला भगत बताने का प्रयास कर रहे हैं।बड़ी मात्रा में भेड़ व ऊंट जंगल मे मौजूद हैं और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नही यह बात हजम नही हो रही,सूत्र बताते हैं इसके पीछे विभाग के जिम्मेदारों की मोन स्वीकृति है।वही भेड़ व ऊंट पोधो की चराई कर जमकर नुकसान पहुँचा रहे हैं और वन अमला तमाशबीन साबित है।

प्राप्त जानकारी अनुसार कटघोरा वनमंडल के वनपरिक्षेञ पसान में गुजरात के खानाबदोशी बड़ी संख्या में भेड़ व ऊंट लाकर गोपनीय रूप से जंगलो में डेरा डाले हुए हैं।ये डेरे बड़ी तादात में है और सैकड़ो की संख्या में भेड़ व ऊंट है, जो बड़े पैमाने पर पौधों व वन्यप्राणियों को नुकसान पहुँचा रहे हैं।वही जंगल के रक्षक यह जानते हुए भी जंगल की रक्षा का जिम्मा उनके हाथों में है उनकी रक्षा करने के बजाए महज औपचारिता निभा रहे हैं।अगर यही आलम रहा तो जंगल मे पौधा रोपण में किये गए करोड़ो रुपये ख़र्च खाक में और वन्यप्राणियों की जान आफत में होगी.?

भेड़ व ऊंट पेड़ पौधों को खाकर नुकसान पहुँचा रहे हैं जिससे मिट्टी का कटाव,वनस्पति का क्षरण और जैव विविधता में कमी आती है।उनके द्वारा फैलाई जाने वाली बीमारियों से वन्यजीवों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है,और उनके पैरों से मिट्टी के संघनन से जल निकासी में बाधा आ सकती है।

वनस्पति पर प्रभाव,अत्यधिक चराई

भेड़ और ऊँट बहुत ज्यादा घास और अन्य वनस्पति चर सकते हैं जिससे कुछ प्रजातियों का पूरी तरह से खात्मा हो सकता है।वे युवा पेड़ो की टहनियों और छाल को भी खाते हैं, जिससे उन्हें बढ़ने और स्वस्थ रहने में मुश्किल होती है।

जब इस वाक्ये की जानकारी वन अमले को दी गई तो वनपरिक्षेञ के अफसर कार्यवाही का हवाला देने लगे हालांकि अभी तक विभाग की ओर से कोई ठोस कार्यवाही सामने नही आई है।जो प्रदर्शित करता है कि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपनी सेवा में कितने कर्तव्यपरायण है।

बताया जाता है कि भेड़ व ऊंट वाले खानाबदोशी बड़ी मात्रा में भेड़ लाकर जंगलो में गोपनीय तरीके से रहकर जीवन पार्जन करते हैं, इन लोगो के बारे में विभाग के पास कोई जानकारी होती है और न ही वे इनके बारे में लेना चाहते।अब ऐसे में ये लोग अगर कोई बड़ी वारदात या किसी घटना को अंजाम दे दे तो उनका जिम्मेदार कौन..? वन अमले के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन को भी इन पर नजर रखने की आवश्यकता है।

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