कोरबा में 'फर्जी पत्रकारिता' और ब्लैकमेलिंग पर प्रशासन सख्त: : कोरबा प्रेस क्लब ने कलेक्टर-SP को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच की मांग
Shubh Arvind Sharma
Fri, Nov 6, 2026
कोरबा में 'फर्जी पत्रकारिता' और ब्लैकमेलिंग पर प्रशासन सख्त: कोरबा प्रेस क्लब ने कलेक्टर-SP को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच की मांग
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में पत्रकारिता की आड़ में डराने-धमकाने, ब्लैकमेलिंग और कथित अवैध वसूली के बढ़ते मामलों पर कोरबा प्रेस क्लब ने कड़ा रुख अपनाया है। सोशल मीडिया और फर्जी न्यूज पोर्टलों के जरिए शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक सक्रिय कथित पत्रकारों की अनैतिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को जिले के कलेक्टर कुणाल दुदावत और पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धार्थ तिवारी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।

सोशल मीडिया बने वसूली का जरिया, ग्रामीण जनप्रतिनिधि सबसे ज्यादा परेशान
प्रेस क्लब द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग भयादोहन (ब्लैकमेलिंग) के लिए किया जा रहा है। खुद को पत्रकार या न्यूज पोर्टल का संचालक बताकर कुछ लोग आम नागरिकों, व्यापारियों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भ्रामक खबरें चलाने की धमकी दे रहे हैं।
खबर दबाने या विज्ञापन के नाम पर सीधे तौर पर आर्थिक लाभ (अवैध वसूली) की मांग की जा रही है। प्रेस क्लब के अनुसार, इस पूरे खेल का सबसे ज्यादा शिकार ग्रामीण क्षेत्रों के सीधे-साधे जनप्रतिनिधि हो रहे हैं।
'प्रेस' लिखी गाड़ियों और फर्जी ID कार्ड्स की होगी स्क्रूटनी
प्रेस क्लब ने प्रशासन के सामने यह गंभीर मुद्दा भी उठाया कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले और कम पढ़े-लिखे लोग भी आज डिजिटल पोर्टल बनाकर खुद को पत्रकार बता रहे हैं। इससे वास्तविक और जिम्मेदार पत्रकारों की साख पर बट्टा लग रहा है।
मुख्य मांगें जो ज्ञापन में रखी गईं:
* वाहनों की चेकिंग: सड़कों पर दौड़ रही 'प्रेस' लिखी दोपहिया और चारपहिया गाड़ियों की सघन जांच हो।
* फर्जी आईडी पर एक्शन: निजी स्वार्थ के लिए बांटे जा रहे फर्जी प्रेस कार्ड्स और उन्हें जारी करने वाली संस्थाओं के दस्तावेजों की जांच की जाए।
* अपराधिक रिकॉर्ड की जांच: डिजिटल पोर्टल की आड़ में सक्रिय संदिग्ध और आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज हो।
वास्तविक पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प
प्रेस क्लब ने यह भी साफ किया कि यह मुहिम स्वतंत्र और खोजी पत्रकारिता को दबाने के लिए नहीं है। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी खबर या आलोचना से असहमति को कार्रवाई का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। लोकतंत्र में प्रशासन और व्यवस्था पर सवाल उठाना मीडिया का अधिकार है। इसलिए कार्रवाई सिर्फ और सिर्फ प्रमाणित गैरकानूनी गतिविधियों, ब्लैकमेलिंग और चरित्र हनन के मामलों पर ही होनी चाहिए।
राज्य स्तर पर निगरानी तंत्र बनाने का सुझाव
कोरबा प्रेस क्लब ने जिला प्रशासन और पुलिस से सिफारिश की है कि वे इस गंभीर मुद्दे को राज्य सरकार के समक्ष भी उठाएं। पुलिस, संबंधित विभागों और जनसंपर्क विभाग (DPR) के बीच एक मजबूत समन्वय तंत्र (Monitoring System) विकसित किया जाना चाहिए ताकि फर्जीवाड़ा रुके और वास्तविक पत्रकारों के अधिकार सुरक्षित रहें। इसके साथ ही क्लब ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सलाह दी है कि वे ऐसे तत्वों से डरने के बजाय सीधे वैधानिक कानूनी कार्रवाई का रास्ता चुनें।
इस दौरान कोरबा प्रेस क्लब के अध्यक्ष नौशाद खान, संरक्षक कमलेश यादव, उपाध्यक्ष राजकुमार शाह, सचिव दिनेश राज, उप सचिव हरीश तिवारी और कार्यकारिणी सदस्य नवाब हुसैन व राजेश मिश्रा (मिठ्ठू) सहित कई वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित रहे।
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कोरबा कटघोरा
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