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न्यायालय की तौहीन या भूमाफियाओं का दुस्साहस? : कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी विवादित जमीन पर बेखौफ राखड़ पटिंग जारी

Shubh Arvind Sharma

Sun, May 10, 2026

न्यायालय की तौहीन या भूमाफियाओं का दुस्साहस?

कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी विवादित जमीन पर बेखौफ राखड़ पटिंग जारी

कोरबा/कटघोरा।

जिले में भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब उन्हें न कानून का डर है और न ही न्यायालय के मर्यादा की परवाह। कटघोरा क्षेत्र के ग्राम तानाखार से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक विकासखंड पौड़ी उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत तानाखार में नेशनल हाईवे-130 किनारे स्थित खसरा नंबर 228/5 रकबा लगभग 5 एकड़ भूमि को लेकर मालिकाना हक का विवाद कटघोरा व्यवहार न्यायालय में लंबित है। यह मामला “रूप सिंह बनाम फगनी बाई व अन्य” प्रकरण क्रमांक 93A/2023 के रूप में माननीय न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद कथित भूमाफियाओं द्वारा विवादित जमीन पर खुलेआम राखड़ पटिंग कराई जा रही है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भूमाफियाओं ने ग्राम पंचायत से कथित रूप से तथ्य छिपाकर एनओसी तक हासिल कर ली थी। जब पंचायत को यह जानकारी मिली कि संबंधित भूमि का मामला न्यायालय में लंबित है, तब पंचायत ने तत्काल प्रभाव से एनओसी निरस्त कर दी। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर न्यायालय में विवादित भूमि पर काम शुरू कैसे हुआ? और जिम्मेदार विभाग अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाए?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में भूमाफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि वे कानूनी प्रक्रिया को भी ठेंगा दिखाकर अपने मंसूबों को अंजाम दे रहे हैं। कोर्ट के फैसले से पहले ही जमीन पर कब्जे जैसी गतिविधियां यह साबित करती हैं कि कुछ कथित लोगों को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, तभी वे बेखौफ होकर विवादित भूमि पर कब्जे और व्यवसायिक गतिविधियां चला रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले समय में भूमाफिया किसी भी गरीब और कमजोर व्यक्ति की जमीन पर कब्जा कर सकते हैं। फिलहाल तानाखार की यह जमीन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग सवाल पूछ रहे हैं — आखिर कोर्ट में लंबित जमीन पर राखड़ पटिंग की अनुमति किसके इशारे पर दी गई?

अब देखना होगा कि प्रशासन और राजस्व विभाग इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करते हैं या फिर भूमाफियाओं के हौसलों के आगे प्रशासन और राजस्व विभाग बोना साबित होंगे?

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