बड़ा खेल: कटघोरा नगर पालिका में : 'अंधेर नगरी-चौपट राजा' का खेल! सरगबन्द तालाब टेंडर में लगी ₹20 लाख की सेंध; क्या सब कुछ CMO की शह पर हुआ?
Shubh Arvind Sharma
Mon, Aug 3, 2026
बड़ा खेल: कटघोरा नगर पालिका में 'अंधेर नगरी-चौपट राजा' का खेल! सरगबन्द तालाब टेंडर में लगी ₹20 लाख की सेंध; क्या सब कुछ CMO की शह पर हुआ?
* वार्ड-4 के प्राचीन सरगबन्द तालाब का मामला: 25% माइनस का काम, चहेते ठेकेदार को SOR से 5% प्लस पर देने की पूरी तैयारी!
* पहली निविदा में 15 ठेकेदार थे रेस में, टाई होते ही जानबूझकर किया रद्द; दूसरी निविदा में 6 ठेकेदारों ने खुद खींचे हाथ!
* कटघोरा पहुंचे बिलासपुर संभाग के कार्यपालन अभियंता अली बख्श ने कहा—"प्रक्रिया को दो बार प्रभावित करना गलत, होगी कड़ी जांच और कार्रवाई!"
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कटघोरा (वेब डेस्क)। कटघोरा नगर पालिका में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की जड़ें किस कदर गहरी हो चुकी हैं, इसका एक और सनसनीखेज प्रमाण सामने आया है। मामला वार्ड क्रमांक-4 स्थित ऐतिहासिक प्राचीन सरगबन्द तालाब के जीर्णोद्धार कार्य से जुड़ा है। अधोसंरचना मद से स्वीकृत 50.77 लाख रुपये की इस मलाईदार परियोजना में नियमों की इस तरह धज्जियां उड़ाई गई हैं कि मानों सरकारी खजाना कोई लावारिस माल हो।
अब शहर की जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह पूरा खेल मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) की नाक के नीचे चल रहा था या फिर इसमें उनकी मूक सहमति और 'शह' शामिल थी? बिना शीर्ष प्रशासनिक संरक्षण के इतना बड़ा टेंडर सिंडिकेट चलाना मुमकिन नहीं है। सूत्रों का बड़ा दावा है कि इस पूरे खेल से शासन के राजस्व को सीधे तौर पर करीब 20 लाख रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना पड़ रहा है।
जब घी सीधी उंगली से नहीं निकला, तो उंगली टेढ़ी कर दी!
पूरी कहानी किसी सोची-समझी स्क्रिप्ट जैसी है। सरगबन्द तालाब के कायाकल्प के लिए जब पहली बार ऑनलाइन निविदा (e-Procurement) बुलाई गई, तो 15 से अधिक ठेकेदारों ने दावेदारी ठोक दी। कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते ठेकेदारों ने शासन की निर्धारित दर (Schedule Rate) से लगभग 25.60 प्रतिशत कम (Minus) दर पर काम करने का टेंडर डाला था। इससे नगर पालिका की तिजोरी में लाखों रुपये की भारी बचत हो रही थी। लेकिन 'रसूखदारों की आंखों का तारा' ठेकेदार इस खुली जंग में पिछड़ रहा था। अंतिम चरण में जैसे ही दो ठेकेदारों की दरें एक समान (टाई) हुईं, वैसे ही अधिकारियों को बहाना मिल गया। पारदर्शी तरीके से लॉटरी या अन्य नियम सम्मत रास्ता निकालने के बजाय, पहली निविदा को ही आनन-फानन में बलि का बकरा बनाकर निरस्त कर दिया गया।
एक तीर से छह शिकार: दूसरी निविदा में चला 'शतरंज का खेल'
पहली निविदा रद्द होते ही दोबारा टेंडर का ढिंढोरा पीटा गया। लेकिन इस बार हवा का रुख बदला हुआ था। दूसरी बार में केवल सात ठेकेदारों ने हिस्सा लिया। इसके बाद जो तमाशा हुआ, उसने टेंडर सिंडिकेट के नंगे सच को सरेबाजार बेनकाब कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, इन सात में से छह निविदाकारों ने नगर पालिका में बकायदा लिखित अर्जी देकर गुहार लगाई कि 'साहेब! हमारा टेंडर मत खोलना।'
तकनीकी जानकारों के पैरों तले से जमीन खिसक गई है। सरकारी ऑनलाइन निविदा के कायदे-कानून चीख-चीख कर कहते हैं कि आए हुए सभी पात्र टेंडर खोलना अनिवार्य है। लेकिन यहाँ तो 'सैंया भए कोतवाल, अब डर काहे का' की तर्ज पर छह ठेकेदारों ने खुद ही घुटने टेक दिए और मैदान में केवल एक 'लाडला' ठेकेदार अकेला दौड़ने के लिए बच गया। इस पूरे चौंकाने वाले घटनाक्रम पर सीएमओ की चुप्पी भी अब गंभीर कटघरे में है।
'अंधेर नगरी' का गणित: 25% माइनस का काम, SOR से 5% प्लस पर मंज़ूर!
मैदान साफ होते ही नगर पालिका ने अपनी दरियादिली दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सूत्रों का दावा है कि रेस में बचे इसी इकलौते प्रभावी ठेकेदार को काम की सौगात दे दी गई है। गजब की बात देखिए, इस ठेकेदार ने एसओआर (Schedule of Rates) से 5 प्रतिशत अधिक (Plus) दर का ठेका पेश किया था, जिसे पालिका ने पलकें बिछाकर कुबूल कर लिया।
* पहले टेंडर का सच: काम 25.60% कम पर हो रहा था।
* दूसरे टेंडर का खेल: काम 5% अधिक पर थमा दिया गया।
* दरों का यह करीब 30% का फासला चीख-चीख कर कह रहा है कि जनता की गाढ़ी कमाई के 20 लाख रुपये को चूना लगाने की बिसात बिछाई जा चुकी है।
कटघोरा पहुंचे बड़े साहब के उड़े तोते, बोले— "यह तो सरेआम गलत है, होगी कड़ी कार्रवाई!"
इस टेंडर घोटाले और सिंडिकेट की गूंज जब बिलासपुर तक पहुंची, तो उच्चाधिकारियों के भी कान खड़े हो गए। कटघोरा दौरे पर पहुंचे क्षेत्रीय कार्यालय नगरीय निकाय बिलासपुर संभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) अली बख्श के सामने जब इस पूरे घालमेल का कच्चा चिट्ठा खोला गया, तो उन्होंने पहले तो अनभिज्ञता जताई, लेकिन मामले की गंभीरता को देखकर वे भी हैरान रह गए।
कार्यपालन अभियंता अली बख्श ने कड़े लहजे में कहा कि "इस निविदा प्रक्रिया को इस तरह दो बार घुमाना और प्रभावित करना पूरी तरह से गलत है।" उन्होंने दोटूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "इस पूरे मामले की परत-दर-परत और दूध का दूध, पानी का पानी करने वाली निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। सरकारी पैसे से होली खेलने वाले जो भी चेहरे इस गड़बड़ी के पीछे होंगे, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।"
अब देखना यह होगा कि साहब की इस जांच की आंच नगर पालिका की मलाईदार कुर्सियों पर बैठे बड़े मगरमच्छों और जिम्मेदार सीएमओ तक पहुंचती है या फिर इस फाइल को भी ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया जाएगा!
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