कटघोरा नगर पालिका महाघोटाला! : RTI के 'दस्तावेजी बम' से उड़ा प्रशासन का सुरक्षा कवच, 'अंधेर नगरी चौपट राजा' की तर्ज पर जारी खेल पर कस रहा कानूनी शिकंजा
Shubh Arvind Sharma
Mon, Aug 31, 2026
कटघोरा नगर पालिका महाघोटाला! RTI के 'दस्तावेजी बम' से उड़ा प्रशासन का सुरक्षा कवच, 'अंधेर नगरी चौपट राजा' की तर्ज पर जारी खेल पर कस रहा कानूनी शिकंजा!
कटघोरा (कोरबा)। नगर पालिका परिषद कटघोरा इन दिनों 'अंधेर नगरी चौपट राजा' और 'चिराग तले अंधेरा' का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है। यहाँ मचे करोड़ों रुपये के घोटालों पर जारी प्रशासनिक लीपापोती का अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज दस्तावेजी खुलासा हुआ है। एक तरफ जहां नगर पालिका के आला अफसर बंद कमरों में बैठकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उच्च कार्यालयों से निकले आरटीआई (RTI) के दस्तावेजों ने यह साबित कर दिया है कि रसूखदार ठेकेदारों और दागी इंजीनियरों को बचाने के लिए जांच रिपोर्ट को जानबूझकर 'प्रक्रियाधीन' के मकड़जाल में फंसाकर दबाया जा रहा है।
इस बड़े फर्जीवाड़े के उजागर होने पर नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले कांग्रेसी नेता विकास सिंह ने भी आंदोलन के दौरान हुंकार भरते हुए सीधे शब्दों में चेतावनी दी थी। उन्होंने अपने तीखे बयान में साफ कहा था कि, "कटघोरा नगर पालिका में भ्रष्टाचार की सारी हदें पार हो चुके हैं। अब किसी भी तरह की कागजी लीपापोती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमारी साफ मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच हो और जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। जब तक ठोस कार्यवाही नहीं होगी, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।"

. आधी-अधूरी पाइप लाइन से कैसे मिलेगा जनता को पानी? सरकारी खजाना साफ, जनता के साथ हुआ बड़ा धोखा!
विभिन्न वार्डों में 15वें वित्त आयोग मद से स्वीकृत राशि से ओ.पी.वी.सी. पाइप लाइन विस्तार का कार्य कराया गया था। इस कार्य में फर्जी भुगतान को लेकर सीएम हेल्पलाइन (टोकन क्रमांक CC260700113959 दिनांक 23.07.2026) में गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई थी।

धरातल का कड़वा सच: नगर पालिका प्रशासन भले ही कागजों पर काम पूरा होने का दावा ठोक रहा हो, लेकिन वार्डों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बड़ा सवाल यह है कि इस आधी-अधूरी पाइप लाइन से जनता को पानी कैसे मिलेगा?
* कई इलाकों में पाइप लाइन को मुख्य स्रोत से जोड़ा ही नहीं गया है, तो कहीं पाइप डालकर उसे खुले में छोड़ दिया गया है।
* जनता आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है और टैंकरों के भरोसे बैठी है।
* सरकारी तिजोरी से ठेकेदारों को मोटा भुगतान तो कर दिया गया, लेकिन बुनियादी समस्या जस की तस है। यह सीधे तौर पर कटघोरा की भोली-भाली जनता के साथ एक सोची-समझी साजिश और विश्वासघात का आरोप है।

बिलासपुर संयुक्त संचालक को गुमराह करने की कोशिश, आरटीआई से खुली पोल
इससे पहले, कटघोरा CMO ने अपने पत्र (क्रमांक 1217-1218 / दिनांक 14/08/2026) में बिलासपुर संयुक्त संचालक को यह लिखकर आश्वस्त करने की कोशिश की थी कि उपअभियंता (सब-इंजीनियर) की रिपोर्ट के अनुसार कोई फर्जी भुगतान नहीं हुआ है और काम पूरा हो चुका है। लेकिन बिलासपुर संभाग के ताजा आरटीआई जवाब ने साफ कर दिया है कि CMO की रिपोर्ट को अंतिम सत्य नहीं माना गया है और कार्यपालन अभियंता स्तर पर इसकी कानूनी व तकनीकी स्क्रूटनी जारी है। स्थानीय प्रशासन का यह पैंतरा अब उन पर ही भारी पड़ता दिख रहा है।
आरटीआई का 'दस्तावेजी प्रमाण': "जांच पूरी नहीं, इसलिए छिपाई जा रही रिपोर्ट"
वार्ड क्र. 05 नवागांव (कटघोरा) के सजग नागरिक श्री अनिल अग्रवाल ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत संयुक्त संचालक कार्यालय, बिलासपुर से पाइप लाइन विस्तार घोटाले की जांच रिपोर्ट मांगी थी।
इसके जवाब में सहायक संचालक/जन सूचना अधिकारी (नगरीय प्रशासन एवं विकास, बिलासपुर) श्री रत्नेश पैकरा द्वारा जारी आधिकारिक पत्र (क्रमांक 1113/सू.अ./47/2026 दिनांक 24/08/2026) ने प्रशासन की मंशा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्र में लिखित रूप से स्वीकार किया गया है कि:
"ओ.पी.वी.सी. पाइप लाइन विस्तार (सिस्टम निविदा क्र. 164564 व 164562, वार्ड क्र. 4, 5, 8, 10, 15) की शिकायत पर कार्यपालन अभियंता द्वारा जांच की जा रही है, जो वर्तमान में 'प्रक्रियाधीन' है। प्रकरण का अंतिम निर्णय न होने के कारण इसकी प्रति उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।"
'हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े लिखे को फारसी क्या'—जब आधी-अधूरी पाइप लाइन बिछाकर जनता को प्यासा रखा गया है, तो बिलासपुर संभाग का तकनीकी विंग महीनों से जांच की फाइल दबाकर किस 'अदृश्य शक्ति' को संरक्षण दे रहा है?
सरगबन्ध तालाब और 'अटल परिसर': काम शुरू होने से पहले ही 'सैटिंग' और नकली मूर्ति का खेल
कांग्रेसी नेता विकास सिंह और स्थानीय जनसंगठनों के आंदोलन के केंद्र में नगर पालिका के ये दो अन्य बड़े मामले भी प्रमुखता से शामिल रहे हैं:
1. सरगबन्ध तालाब टेंडर घोटाला: नगर के ऐतिहासिक सरगबन्ध तालाब के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के प्रोजेक्ट में धरातल पर अभी काम शुरू भी नहीं हुआ था, लेकिन टेंडर प्रक्रिया के दौरान ही चहेते ठेकेदारों को उपकृत करने के लिए नियमों को ताक पर रखकर भारी अनियमितताएं किए जाने के आरोप हैं। काम शुरू होने से पहले ही टेंडर लेवल पर इस तरह की 'सैटिंग' ने पूरी टेंडर प्रक्रिया को कानूनी रूप से विवादों में ला दिया है।
2. 'अटल परिसर' घोटाला: पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में बने परिसर में 13 से 14 लाख रुपये की लागत से ब्रॉन्ज (कांस्य) धातु की भव्य मूर्ति लगनी थी लेकिन आरोपों के मुताबिक, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से असली धातु की जगह सीमेंट और कंक्रीट की सस्ती मूर्ति खड़ी कर दी गई, जिसका खुलासा पहली बारिश के बाद उखड़े पेंट से हो गया।यह देश के गौरवशाली नेता के अपमान के साथ-साथ सीधे तौर पर जनता के पैसे की हेराफेरी का मामला है ।भ्रष्टाचारियों को यह समझ लेना चाहिए कि 'काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती', उनका यह फर्जीवाड़ा अब कानूनी गले की फांस बनने वाला है।

कानूनी शिकंजा: सह-आरोपी की भूमिका में स्थानीय प्रशासन!
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरा मामला अब विभागीय खानापूर्ति से ऊपर उठ चुका है और 'दूध का दूध और पानी का पानी' होने का समय आ गया है:
* धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश: टेंडर की शर्तों को बदलना, ब्रॉन्ज की जगह सीमेंट की मूर्ति लगाना, उच्च अधिकारियों को गुमराह करने के लिए पत्र लिखना, अधूरी पाइप लाइन पर रनिंग बिल पास करना और जनता को बुनियादी सुविधा से वंचित रखना सीधे तौर पर IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है।
* भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम : लोक सेवक द्वारा ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी खजाने का दुरुपयोग करना इस अधिनियम के तहत गम्भीर अपराध है जो उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजने के लिए पर्याप्त हो सकता है।
* प्रशासन की चुप्पी: प्रत्यक्ष प्रमाण मिलने के बावजूद महीनों तक जांच को 'प्रक्रियाधीन' रखना यह दर्शाता है कि उच्च अधिकारी दोषियों को संरक्षण देकर इस अपराध में सह-आरोपी की भूमिका निभा रहे हैं।
जनता की हुंकार: 'प्रक्रियाधीन' का नाटक बंद करो, FIR दर्ज करो!
कटघोरा की जनता और विपक्षी संगठनों का साफ कहना है कि अब कागजों का खेल और विभागीय लीपापोती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि समय रहते इस "प्रक्रियाधीन" जांच की फाइनल रिपोर्ट को सार्वजनिक कर मुख्य साजिशकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो इन दस्तावेजी सबूतों (RTI और सीएम हेल्पलाइन लेटर्स) के आधार पर माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी, जिसके बाद भ्रष्ट अधिकारियों को कोर्ट के कटघरे में जवाब देना होगा।
"इस पूरे मामले या इसमें दर्ज शिकायतों पर यदि कटघोरा नगर पालिका प्रशासन, मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO), संबंधित उपअभियंता (सब-इंजीनियर) या संबंधित ठेकेदार/फर्म अपना कोई भी पक्ष, स्पष्टीकरण या तकनीकी सफाई रखना चाहते हैं, तो हमारा न्यूज़ पोर्टल उनकी प्रतिक्रिया और वर्जन को भी पूरी निष्पक्षता के साथ प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।"
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