राजनीतिक दलों का पीएम केअर फंड में योगदान की जानकारी देने से पीएमओ का इनकार “अनिल गलगली”

संवाददाता नीरज शर्मा

कोविड19 की महामारी से निपटने के लिए हर वर्ग के लोग प्रधानमंत्री केअर फंड में अपना योगदान दे रहे है। ऐसे में राजनीतिक दलों का योगदान की जानकारी मांगने पर आरटीआई कार्यकर्ता को प्रधानमंत्री कार्यालय ने मायूस किया। वैसे गलगली ने एकसाथ चार विभिन्न विषयों पर जानकारी मांगने की कोशिश की थी।

मुंबई से आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने चार विभिन्न प्रकार की आरटीआई आवेदन कर प्रधानमंत्री कार्यालय से जानकारी मांगी थी। इनकी सभी आरटीआई को यह कहकर खारिज किया गया कि पीएम केयर फंड आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 2 (एच) के अंतर्गत एक सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है। हालांकि, पीएम केयर्स फंड के संबंध में प्रासंगिक जानकारी वेबसाइट pmcares.gov.in पर देखी जा सकती है। अनिल गलगली ने राजनीतिक दलों के योगदान की जानकारी मांगी थी। इसे साफ हैं कि शायद ही किसी दल ने योगदान दिया होगा।

*कितने चेक बाउंस हैं?*

अनिल गलगली ने दूसरे आरटीआई में विभिन्न लोगों द्वारा जमा चेक की स्थिती और बाउंस होने की स्थिति में की गई कारवाई का ब्यौरा मांगा था। इसे भी देने से प्रधानमंत्री कार्यालय ने इनकार किया।
 
*कितना राज्यों को दिया?*

अनिल गलगली ने अपनी तीसरी आरटीआई में पीएम केअर फंड से कोविड19 के तहत राज्यों को आबंटित धनराशि की जानकारी मांगी थी। उनका मानना हैं कि हर राज्य पीएम केअर फंड से आस लगाए बैठा हैं। यह जानकारी महत्वपूर्ण होने के बावजूद पीएमओ ने इस जानकारी को साझा नहीं किया।

*कोविड पर कितना किया खर्च?*

अनिल गलगली में अपनी चौथी आरटीआई में पीएम केअर फंड में दानदाताओं द्वारा जमा धनराशि और उससे कोविड19 के नियंत्रण और रोकथाम पर किए गए खर्च का ब्यौरा मांगा था। आज कोविड पर काम करनेवाले सभी प्रकार के लोगों को पीपीई किट्स, मास्क नहीं मिलने की शिकायत हैं। कई अस्पतालों में उपकरणों की किल्लत हैं। लेकिन इसे भी देने से पीएमओ ने इनकार किया।

*वेबसाइट भी छुपाती हैं जानकारी*

अनिल गलगली के चारों आरटीआई में से एक का भी जबाब नहीं मिला। जब गलगली ने वेबसाइट का निरीक्षण किया तब वहां पर जमा धनराशि और खर्च का ब्यौरा नहीं पाया गया। जबकि सार्वजनिक प्राधिकरण न होते हुए भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तसबीर दिख रही थी।

अनिल गलगली का आरोप हैं कि जमा धनराशि दान से आने से इसका हिसाब वेबसाइट पर अपलोड करना चाहिए ताकि किसी को आरटीआई करने की आवश्यकता न हो। एकओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह किसी को भी किसी भी प्रकार का सवाल और जानकारी पूछने की अपील करते हैं और दूसरीओर उनका ही पीएमओ कार्यालय उनकी अपील का उपहास करने का आरोप अनिल गलगली का हैं।

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